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83 वर्षीय तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को सीने में संक्रमण के चलते मंगलवार को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। दलाई लामा को स्वास्थ्य संबंधी कुछ दिक्कतें होने के कारण उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में जांच के लिए लाया गया। बताया जा रहा है वह चेकअप के लिए नियमित तौर पर अस्पताल आते रहे हैं।

पिछले महीने अगले बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक नेता के बारे में दलाईलामा ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा था कि उनका अगला अवतार भारत से होगा और चीन द्वारा चुने गए व्यक्ति को मान्यता नहीं दी जाएगी। इस पर चीन ने बुधवार को कहा कि तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के उत्तराधिकारी के लिए बीजिंग से अनुमति लेनी जरूरी होगी।

चीन ने यह बयान ऐसे वक्त जारी किया जब मंगलवार को दलाई लामा को सीने में संक्रमण के चलते दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। 83 साल के आध्यात्मिक गुरु की स्थिति स्थिर है। जब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग से मीडिया ने पूछा कि क्या दलाई लामा के उत्तराधिकारी को घोषित करने की कोई योजना है, तो उन्होंने कहा कि पुनर्जन्म व्यवस्था के तहत चुने गए उत्तराधिकारी को चीन की मंजूरी की जरूरत होगी।

कांग ने कहा, मैं 14वें दलाई लामा की शारीरिक स्थिति के बारे में अवगत नहीं हूं। जहां तक पुनर्जन्म मसले का सवाल है यह स्पष्ट है कि यह तिब्बती बौद्धों की मूलभूत व्यवस्था है। यह एक तय रीति-रिवाज है। इस धरोहर को सम्मान देने और संरक्षित करने के लिए हमारे पास संबंधित नियामक हैं। 14वें दलाई लामा को तय धार्मिक रीति-रिवाजों के तहत चुना गया था और तब उन्हें तत्कालीन सरकार ने मान्यता दी थी।

बता दें तिब्बतियों के 14वें दलाई लामा 1959 की शुरुआत में चीनी शासन के खिलाफ एक विद्रोह के बाद अपने प्रशंसकों के साथ तिब्बत से भागकर भारत आ गए थे और तब से भारत में ही हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला को अपना ठिकाना बनाया। चीन ने 1950 में तिब्बत को अपने कब्जे में ले लिया था और वह 14वें दलाई लामा को अलगाववादी मानता है।

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