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कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका ने अपना रूख पूरी तरह साफ कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने कह दिया है कि कश्मीर भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षीय मसला है और अमेरिका इसमें कतई दखल नहीं देगा। अमेरिका ने मध्यस्थता करने से साफ इंकार कर दिया है। उधर चीन पहुंचे विदेश मंत्री एस जशंकर ने कश्मीर से धारा 370 हटाने को लेकर कहा कि भारत ने जो फैसला लिया है वो उसके संविधान के तहत है और इससे पाकिस्तान की सीमा पर कोई असर होता है और न ही चीन की सीमा पर।

वहीं संयुक्त राष्ट्र परिषद में भी पाकिस्तान की दाल नहीं गली है जिसके चलते पाकिस्तान अब अंत्राष्ट्रीय पटल पर पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है। इस बीच खबर है कि पाकिस्तानी सेना एलओसी की ओर बढ़ रही है और लद्दाख के सामने अपने एयरबेस में लड़ाकू विमानों की तैनाती कर रही है। पाकिस्तानी सेना की इस तैयारी पर भारतीय सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा कि हम अलर्ट हैं. अगर वह एलओसी पर आना चाहते हैं तो यह उन पर निर्भर करता है उनको जवाब मिलेगा।

कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद पाकिस्तान पूरी तरह बौखला गया है। उसने इस मामले में अमेरिका, चीन और कई मुस्लिम देशों से समर्थन की आस लगायी थी लेकिन हर जगह उसे नाकामयाबी ही हासिल हुई। अमेरिका में भारतीय राजदूत हर्षवर्धन सिंगला के हवाले से खबर आई है कि अमेरिका कश्मीर को लेकर अपनी पुरानी नीति पर कायम है।

अमेरिका चाहता है कि भारत और पाकिस्तान एक साथ मिलकर इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करें। राजदूत हर्षवर्धन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड पहले ही साफ कर चुके हैं कि अगर भारत और पाकिस्तान चाहते हैं कि वे मध्यस्थता करें तो वे मध्यस्थता कर सकते हैं। लेकिन भारत का रुख साफ है कि कश्मीर द्विपक्षीय मुद्दा है, जिस पर फैसला केवल दोनों देश कर सकते हैं।

जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान दुनिया के सामने मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को किसी देश में तवज्जो नहीं मिल रही है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी चीन दौरे पर मदद मांगने गए थे लेकिन वहां भी पाकिस्तान को निराशा हाथ लगी है। चीन पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कश्मीर से धारा 370 हटने को लेकर भारत का रुख साफ किया।

जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री वांग ली के साथ मुलाकात में कहा कि भारत ने जो फैसला लिया है वह उसके संविधान के तहत है और उससे न तो पाकिस्तान की सीमा पर कोई असर पड़ता है और न ही चीन की सीमा इस फैसले से प्रभावित होती है। चीन ने भारत के सामने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के फैसले पर सवाल खड़े किए थे और कहा था कि इससे क्षेत्रीय अखंडता पर असर पड़ सकता है।

साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, ‘बातचीत के दौरान अक्साई चिन का मसला भी उठा, चीन को चिंता थी कि अनुच्छेद 370 की वजह से भारत-चीन की सीमा पर असर पड़ सकता है. लेकिन, उन्होंने साफ किया कि भारत का फैसला अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कुछ असर नहीं डालेगा. इससे सिर्फ भारत के अंदर ही राज्य में असर होगा।

भारत को दुनिया के कई देशों से जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाने के फैसला पर समर्थन मिल चुका है। हाल ही में रूस ने साफ शब्दों में कहा था कि जम्मू और कश्मीर को दो भागों में विभाजित और केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला संविधान के अनुसार ही लिया गया है। पकिस्तान ने पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र को भी इस मामले में एक पत्र लिखा था। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जोआना रोनक्का ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेश से भी खत लिखकर कहा था कि जम्मू-कश्मीर में भारत ने अपने फैसले से 1949 के यूएनएससी रेजॉल्यूशन का उल्लंघन किया है. लेकिन पाकिस्तान का दांव उल्टा पड़ गया और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने कश्मीर के समाधान के लिए पाकिस्तान को शिमला समझौते की याद दिला दी। शिमला समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच यह तय हुआ था कि दोनों अपने सारे विवाद द्विपक्षीय स्तर पर ही सुलझाएंगे.

पाकिस्तान को कश्मीर पर सबसे बड़ा झटका इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) से लगा। ओआईसी ने कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन के पुराने राग को तो अलापा लेकिन भारत-पाक की कूटनीतिक जंग में शामिल होने से इनकार कर दिया। ओआईसी के ताकतवर देश यूएई, सऊदी अरब और तुर्की ने भारत-पाकिस्तान से कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय स्तर पर बातचीत कर सुलझाने की मांग की। यूएई ने कश्मीर को भारत का आंतरिक मुद्दा बताते हुए पाकिस्तान को आईना दिखा दिया।

इस बीच खबर है कि सभी ओर से निराशा हाथ लगने के बाद पाकिस्तान अब युद्ध की तैयारी कर रहा है। सुत्रों की मानें तो पाकिस्तानी सेना एलओसी की ओर बढ़ रही है और लद्दाख के सामने अपने एयरबेस में लड़ाकू विमानों की तैनाती कर रही है। पाकिस्तानी सेना की इस तैयारी पर भारतीय सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा कि हम अलर्ट हैं. अगर वह एलओसी पर आना चाहते हैं तो यह उन पर निर्भर करता है. उनको जवाब मिलेगा।

दरअसल पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने दावा किया था कि भारी हथियारों से लैस पाकिस्तान की सेना लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) की ओर बढ़ रही है. पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने ट्वीट कर कहा कि उन्हें पाक अधिकृत कश्मीर के कई दोस्तों ने फोन कर बताया है कि साजो-सामान से लैस पाकिस्तान की सेना LoC की ओर बढ़ रही है। हामिद मीर का दावा है कि पीओके में लोग पाकिस्तान की सेना का स्वागत कर रहे हैं। हालांकि हामिद मीर के इस दावे की कहीं से पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान सरकार ने इसे लेकर कोई बयान नहीं दिया और न ही भारत सरकार की ओर से ऐसा कोई बयान दिया गया है।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के खात्मे के बाद पाकिस्तान लगातार प्रोपगैंडा वार कर रहा है। इस मुद्दे पर पाकिस्तान दुनिया को बरगलाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि पाकिस्तान को इस मुद्दे पर कहीं से कामयाबी नहीं मिली है और वह पूरी तरह अलग-थलग दिखाई दे रहा है।

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