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New Delhi : भारत द्वारा जम्मू कश्मीर के विशेष प्रावधान को खत्म करने और जम्मू-कश्मीर, लद्दाख को केंद्र शाषित प्रदेश बनाने के फ़ैसले के बाद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने तीन दिवसीय दौरे (11-13 अगस्त ) पर बीजिंग पहुँच चुकें है।

मोदी सरकार द्वारा दोबारा सत्ता में आने के बाद किसी भी मंत्री की यह पहली यात्रा है। गौरतलब है कि विदेशमंत्री जयशंकर की यह यात्रा पाक विदेशमंत्री शाह मेहमूद कुरैशी की यात्रा के बाद हो रही है। ऐसे में यह यात्रा भारत के लिये काफी महत्वपूर्ण होने जा रही है।

अपनी इस चीन यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने समकक्ष चीनी विदेशमंत्री वांग यी के साथ सांस्कृतिक और पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज (एचएलएम) पर भारत-चीन उच्च-स्तरीय तंत्र की दूसरी बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे। HLM का उद्देश्य लोगों से लोगों के बीच संबंधों को बढ़ाना और पर्यटन, कला, फिल्म, मीडिया, संस्कृति, खेल जैसे क्षेत्रों में व्यस्तता बढ़ाना है।

इस यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “दूसरी एचएलएम बैठक 1 एचएलएम बैठक के परिणामों पर अनुवर्ती कार्रवाई करने और हमारे दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने के लिए नई पहल पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगी।” इसके अलावा विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, “चीन बहुत महत्वपूर्ण साझेदार है। सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए हमारे पास कई चैनल उपलब्ध हैं।”

विदेश मंत्री एस जयशंकर इस वर्ष के अंत में होने जा रही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए चीनी अधिकारियों के साथ वार्ता भी करेंगे।

आपको बता दें एस जयशंकर,पहले कैरियर राजनयिक है जो भारत के विदेश मंत्री बने है। उन्होंने वर्ष 2009 से 2013 तक चीन में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया, जो एक किसी भी भारतीय राजदूत द्वारा सबसे लंबा कार्यकाल था। एस जयशंकर ने चीन में भारतीय राजदूत रहते हुये डोकलाम मुद्दे को अपनी कूटनीति के चलते शांतिपूर्वक हल कराया था।

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