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भारत और चीन के रिश्ते हाल फिलहाल डांवाडोल चल रहा है। दरअसल, चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी ने चीन को भारत से दूर कर दिया है। इसके साथ ही डोकलाम विवाद ने दोनों देशों के बीच की दूरी बढ़ा दी थी। लेकिन अब दोनों देश इस दूरियों को मिटाने की कोशिशों में लग गए हैं। विदेश सचिव विजय गोखले ने शुक्रवार को चीन का दौरा किया और वहां के विदेश मंत्री वांग यी से कई मुद्दों पर बातचीत की। इसमें द्विपक्षीय संबंधों में आए तनाव और मालदीव में जारी राजनीतिक संकट शामिल रहे। इस मुलाकात की जानकारी बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास से सामने आई है। जिसमें कहा गया है कि विदेश सचिव विजय गोखले चीन के दौरे पर हैं। इस दौरान वे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बैठकों में हिस्सा लेंगे।

चीन के विदेश मंत्रालय ने गोखले और वांग की बातचीत पर शुक्रवार देर रात बयान जारी किया। बयान के मुताबिक वांग ने कहा है कि दोनों पक्षों को आपसी रणनीतिक विश्वास को बढ़ाना चाहिए। दोनों देशों के नेताओं की सहमति के अनुसार आपसी विकास की रेखा पर काम करना चाहिए। वांग ने कहा, हम उम्म्मीद करते हैं कि भारत संवेदनशील मुद्दों पर चीन के साथ विवेकपूर्ण ढंग से काम करेगा। इसमें मालदीव का राजनीतिक संकट शामिल है। बता दें कि  डोकलाम विवाद को सुलझाने में विजय गोखले की अहम भूमिका रही। चीनी विदेश मंत्री के साथ मुलाकात में विजय गोखले ने भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधो में तनाव और सीमा विवाद को लेकर बात की। दोनों के बीच यह बातचीत भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जून में होने वाली चीन की यात्रा से पहले हुई है।  गौरतलब है कि मोदी जून में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन की यात्रा पर जाएंगे।

यह मुलाकात कई मायनों में काफी अहम है क्योंकि दोनों देशों के बीच मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के मुद्दे पर भी बात हुई और पहली बार चीन पाकिस्तान को काली सूचि में शामिल करने के विरोध में नहीं था। इस मुलाकात में अगले एक वर्ष के लिए रोडमैप पर चर्चा की गई।

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