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भारत ने कुलभूषण को पाकिस्तान के चंगुल से निकालने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय कोर्ट से गुहार लगाई तो पाकिस्तान को कुलभूषण की सजा पर रोक लगानी पड़ गई। अब अंतरराष्ट्रीय अदालत 15 मई को कुलभूषण मामले की सुनवाई करेगा। जिसका अदालत की वेबसाइट पर सीधा प्रसारण किया जाएगा। इंटरनेशलन कोर्ट ऑफ जस्टिस के एक्शन से पाकिस्तान परेशान हो गया है। 15 मई को होने वाली सुनवाई से पहले पाकिस्तान पूरी तैयारी कर रहा है।

पाक ने दिया तर्क

पाकिस्तान तर्क दे रहा है कि वह इस मामले को राष्ट्रमंडल देशों का मामला बता कर अंतरराष्ट्रीय अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर करवा सकता है। आपको बता दें कि ऐसे मामले जो राष्ट्रमंडल देशों के अंतर्गत आते हैं उन्हें इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा जाता है। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ ने पाकिस्तानी अख़बार डॉन को बताया कि सन् 1999 में पाकिस्ताननी नौसेना का विमान भारत द्वारा गिराए जाने के मुद्दे पर हुए फैसले पर सवाल उठा सकता है। पाकिस्तान इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में ले गया था। उस वक्त भारत ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में कॉमन वेल्थ देशों के बीच विवाद का मामला नहीं आता।  इसके अलावा भारत ने 1974 में भी ऐसे विवादों में छूट की अपील की थी। जिसके एक साल बाद इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस की 16 सदस्यीय बेंच ने इस बात पर सहमति जताई कि ऐसे राष्ट्रमंडल देशों के मामले उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।

पाक के तर्क पर भारत का जवाब

हालांकि 2005 से 2009 तक अंतरराष्ट्रीय अदालत में बतौर जज पद पर रहे पाकिस्तानी ज्यूरिस्ट अली नवाज चौहान ने डॉन अख़बार को बताया कि यदि जाधव का मामला मानवाधिकार के तहत उठाया जाता है तब यह अंतराष्ट्रीय कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आएगा। आपको बता दें कि पाकिस्तान के इस तर्क का तोड़ भारत ने पहले ही ढूंढ लिया है। भारत ने आईसीजे में पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि उसने  1963 के वियाना संधि का उल्लं‍घन किया है। भारत ने कोर्ट से कहा कि कुलभूषण जाधव को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। इसके अलावा भारत के बार-बार अनुरोध के बाद भी पाकिस्तान ने भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को जाधव से मिलने की इजाजत नहीं दी। भारत ने अदालत से बताया कि ईरान से जाधव का अपहरण कर लिया गया जहां वे नौसेना से रिटायर होने के बाद व्यापार कर रहे थे। पाकिस्तानी सैन्य कोर्ट ने बिना कुलभूषण का पक्ष सुने उसे फांसी की सजा सुना दी। भारत ने इन सभी तर्कों के आधार पर कोर्ट से कहा कि यह कुलभूषण का केस मानवधिकार का मामला है लिहाजा इसपर सुनवाई होनी चाहिए।

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