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अफगानिस्तान में भारत की बढ़ती भूमिका शायद पाकिस्तान को रास नहीं आ रही है।  प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने कल अफगानिस्तान में भारत की किसी भी भूमिका को खारिज कर दिया है। अब्बासी का कहना है कि युद्धग्रस्त इस देश में नई दिल्ली को शामिल करने की ट्रंप प्रशासन की इच्छा हानिकारक होगी।

दरअसल कल ट्रम्प प्रशासन ने अपनी दक्षिण एशिया नीति की घोषणा की है, जिसमें अफगानिस्तान में भारत के साथ सामरिक भागीदारी को बढ़ावा देना भी शामिल है। अरब न्यूज़ के हवाले से शहीद अब्बासी ने कहा है कि ‘‘हम नहीं मानते कि पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों में भारत को लाने से कुछ भी हल करने में मदद मिलेगी, विशेष रूप से अफगानिस्तान में जहां हम भारत के लिए कोई भूमिका नहीं देखते। भारत का अमेरिका के साथ एक संबंध है। वह उनके और अमेरिका के बीच है।’’

उन्होंने सऊदी अरब के समाचार पत्र से साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में एक ऐसे समाधान के जरिए शांति चाहता है जो अफगानों का और अफगानों के नेतृत्व में हो।

इतना ही नहीं पाकिस्तानी अखबार में छपी एक खबर के मुताबिक, पाकिस्तान ने कहा कि वह पहले ही आतंकियों के पनाहगाहों को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन अगर अमेरिका इस पर और एक्शन की मांग करता है तो बातचीत बंद करना ही एकमात्र विकल्प होगा। इस रिपोर्ट में अमेरिका की ‘नई अफगान नीति’ की भी आलोचना की गई है।

बता दें कि भारत अफगानिस्तान के साथ रणनीतिक भागीदार है और वह देश के ढांचागत निर्माण में मदद कर रहा है। साथ ही भारत ने अफगानिस्तान को कई परियोजनाओं के लिए 2 अरब डॉलर की सहायता राशि भी दी है।

इससे पहले अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने कहा था कि अफगानिस्तान में अपने सैनिक न भेजने का भारत का फैसला पाकिस्तान की चिंताओं की वजह से है क्योंकि इससे क्षेत्र में नई जटिलताएं पैदा होंगी। मैटिस ने सदन की सशस्त्र सेवा समिति में सांसदों के समक्ष अफगानिस्तान की मदद में भारत के योगदान की सराहना की और कहा कि नई दिल्ली ने अफगानिस्तान की मदद करने की दिशा में समग्र रवैया अपनाया है।

उन्होंने दक्षिण एशिया पर कांग्रेस की सुनवाई के दौरान सांसद डग लैम्बोर्न के एक सवाल के जवाब में कहा, ‘यह वास्तव में एक बहुत ही समावेशी रवैया है जो भारत अपना रहा है। आप देखेंगे कि मैंने भारतीय सैनिकों का विकल्प पाकिस्तान के लिए उत्पन्न होने वाली जटिलता की वजह से छोड़ दिया।’

गौरतलब है कि पाकिस्तान शुरू से ही आतंकवाद और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देते रहा है और यह तो जगजाहिर है कि भारत हर उस देश के साथ खड़ा रहता है जो आतंकवाद से लड़ता रहा है या किसी के साछ खड़ा रहा है।

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