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अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) ने रूस, ईरान और उत्तर कोरिया के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाने के लिए भारी संख्या में मतदान किया है। इस प्रतिबंध विधेयक के समर्थन में कुल 419 और विरोध में केवल 3 वोट पड़ें।

यह विधेयक अमेरिका और उसके सहयोगियों को कमजोर करने वाले और खतरनाक युद्धकारी कदम उठाने वाले देशों के खिलाफ पेश किया गया है। इसका उद्देश्य अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप करने और यूक्रेन और सीरिया में मॉस्को की सैन्य आक्रामकता के लिए उसे दंडित करना है। इसके अलावा यह विधेयक आतंकवाद को समर्थन जारी रखने के लिए ईरान को दंडित करने के उद्देश्य से भी पारित किया गया है।

यह विधयेक अब उच्च सदन यानि सीनेट के पास जाएगा, जहां पर इस विधेयक को पहले से ही समर्थन मिला हुआ है। हालांकि उत्तर कोरिया पर दंडात्मक कार्रवाई को शामिल करने या नहीं करने पर अभी भी बहस जारी है।

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के स्पीकर पॉल रेयान ने कहा कि यह इतिहास में सबसे बड़े प्रतिबंध मसौदों में से एक है और सबको दलगत भावना से ऊपर उठकर इसके लिए वोट करना चाहिए। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी डेमोक्रेटिक के व्हिप स्टेनी एच होयर ने कहा कि यह विधेयक रूस को अपनी ताकत दिखाने से रोकेगा और उन देशों को सशक्त बनाएगा जो रूसी आक्रामकता के खिलाफ हमारे साथ खड़े हैं।

सीनेट में यह विधेयक पारित होने के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा। ट्रम्प चाहें तो अपने ‘वीटो‘ का प्रयोग कर इस विधेयक को रोक सकते हैं, पर इसकी संभावना काम ही लग रही है।

इस प्रतिबंध विधेयक पर रूस ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो कुछ भी हुआ वह समझ से बाहर है। रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रियाबकोव ने कहा कि इससे रुस का अमेरिका के साथ संबंधों को सामान्य करने की संभावनाओं को झटका लगेगा, यह बहुत ही गंभीर कदम है।

वहीं ईरान ने इस प्रतिबंध विधेयक को शत्रुतापूर्ण करार दिया। ईरान के उप विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि यह विधेयक वर्ष 2015 के परमाणु करार के तहत किए गए वादे का उल्लंघन है और ईरान इसका अपने तरीके से जवाब देगा।

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