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सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने को लेकर चर्चा में रहीं महिला कार्यकर्ता रेहाना फातिमा को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया कर दिया। जस्टिस अरुण मिश्रा का मानना है कि उनकी तस्वीर अश्लीलता फैला रही है और ऐसी तस्वीरों से बढ़ते बच्चों में देश की संस्कृति का क्या प्रभाव पड़ेगा। केरल हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनोती दी थी महिला एक्टिविस्ट रेहाना फातिमा ने। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की गई थी।

सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई एक वीडियो क्लिप पर हंगामा मचाने के बाद फातिमा के खिलाफ विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दो शिकायतें दर्ज की गईं थी।
इन वीडियोज में उनके नाबालिग बेटे और बेटी को उनके अर्ध नग्न शरीर पर पेंटिंग करते देखा गया था। उन्होंने हैशटैग बॉडीआर्ट और पॉलिटिक्स के साथ यह वीडियो पोस्ट की थी। इस पर आपत्ति जताते हुए, केरल स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स ने पुलिस को उनके खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए कहा था।

शिकायत के बाद, उन्होंने हाई कोर्ट में एक अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। जिसको अदालत ने 24 जुलाई को खारिज कर दिया था और कहा है कि पुलिस अपनी जांच । हाईकोर्ट ने फातिमा की उस दलील को ठुकरा दिया जिसमें कहा गया था कि वो तो बच्चों में जागरुकता फैलाने के लिए ये सब कर रही थी।

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