आपातकाल की 45वीं बरसी : जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कर दी थी “लोकतंत्र” की हत्या

1971 में इंदिरा गांधी रायबरेली से सांसद चुनी गईं.. इंदिरा के खिलाफ संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राजनारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की.. राजनारायण ने अपनी याचिका में इंदिरा गांधी पर चुनाव में धांधली के आरोप लगाए.. 12 जून 1975 को राजनारायण की इस याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आया.. इंदिरा गांधी को चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का दोषी पाया गया.. हालांकि, अन्य आरोप खारिज कर दिए गए.. हाई कोर्ट ने इंदिरा गांधी के निर्वाचन को रद्द कर दिया और 6 साल तक उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी…श्रीमती गांधी सत्ता की कुर्सी इस तरह हाथ से निकलते बर्दाश्त नहीं कर पाई और आपातकाल की नींव रख दी..

 

हाई कोर्ट के फैसले के बाद इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ता.. इसलिए प्रधानमंत्री के उस वक्त के आधिकारिक आवास.. 1, सफदरजंग रोड पर आपात बैठक बुलाई गई.. इंदिरा ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ 23 जून को सुप्रीम कोर्ट में अपील की.. एक तरफ इंदिरा गांधी कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहीं थीं, दूसरी तरफ विपक्ष उन्हें घेरने में जुटा हुआ था.. 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंदिरा विरोधी आंदोलन के अगुवा जयप्रकाश नारायण ने एक रैली का आयोजन किया.. अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, आचार्य जेबी कृपलानी, मोरारजी देसाई और चंद्रशेखर जैसे तमाम दिग्गज नेता एक साथ एक मंच पर मौजूद थे..

 

विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से इमरजेंसी के घोषणा पत्र पर दस्तखत करा लिए.. इसके तुरंत बाद जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई समेत सभी विपक्षी नेता गिरफ्तार कर लिए गए.. 26 जून 1975 को सुबह 6 बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई गई.. इस बैठक के बाद इंदिरा गांधी ने ऑल इंडिया रेडियो के ऑफिस पहुंचकर देश को संबोधित किया.. उन्होंने आपातकाल के पीछे आंतरिक अशांति को वजह बताया..

आपातकाल के दौरान जमकर जुल्म हुए, विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया.. प्रेस की आजादी छीन ली गई.. विरोध करने वालों पर जमकर अत्याचार हुए.. 21 महीने में 11 लाख लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया.. लेकिन अंत में जीत सत्य की हुई और 21 मार्च 1977 को इमरजेंसी खत्म करने की घोषणा की गई.. देश पर थोपी गई इमरजेंसी के कारण लोगों में काफी गुस्सा था.. और इसका असर आम चुनाव में दिखा.. चुनावों में कांग्रेस की ज़बरदस्त हार हुई.. रायबरेली से इंदिरा गांधी और अमेठी से संजय गांधी को लोगों ने खारिज कर दिया.. 298 सीटों के साथ जनता पार्टी की सरकार बनी.. कांग्रेस 153 सीटों पर सिमटकर रह गई.. आपातकाल की आफत के कारण.. आज़ादी के बाद पहली बार कांग्रेस चुनाव हारी..

    ‘सिंहासन ख़ाली करो कि जनता आती है’ के नारे ने देश का इतिहास बदल दिया..

ब्यूरो रिपोर्ट..

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