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कुछ दिनों पहले हिंद महासागर में एक अनोखी घटना देखने को मिली। म्यामांर के यंगून क्षेत्र में एक 600 फीट लंबा जहाज दिखा जो 9 साल पहले लापता हो गया था। लेकिन इसमें कोई चालक दल का सदस्य नहीं था। दुनियाभर में इस जहाज को लेकर चर्चा हो रही है और इसके बारे में अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। इस जहाज को गोस्ट शिप (भूतों वाला जहाज) भी कहा जा रहा है।

म्यामांर समुद्र तट के पास ‘सैम रताउलांगी पीबी 1600’ जहाज जंग लगे हुए हालत में था। मालवाहक जहाज पर ना तो चालक दल का कोई सदस्य दिखा और ना ही कोई सामान। इस पर इंडोनेशिया का झंडा लगा हुआ था।

इस जहाज के ट्रांसपोंडर ने आखिरी बार 2009 में ताईवान के पास अपनी मौजूदगी होने की खबर दी थी। म्यामांर के समुद्री जल में लावारिस जहाज नजर आने की यह पहली घटना है। म्यामांर की वाणिज्यिक राजधानी के तट से करीब 11 किलोमीटर दूर मर्तबान की खाड़ी में सबसे पहले मछुआरों को यह जहाज नजर आया।

म्यांमार  की नौसेना को अब तक की जांच में पता चला है कि बांग्लादेश में कंटेनर जहाज खराब मौसम या ऐसी ही किसी परिस्थिति में फंस गया होगा, जिसके बाद इसका कोई सुराग नहीं मिल सका। म्यांमार नौसेना मान रही है कि शायद परिस्थितियां खराब होने के कारण जहाज पर सवार चालक और क्रू मेंबर्स ने जहाज छोड़कर छोटी जहाजों के जरिए सुरक्षित चले गए होंगे।

यंगून पुलिस ने फेसबुक पर एक बयान में कहा कि अधिकारी और नौसैनिक कल जहाज पर गये थे ताकि उसके बारे में और जानकारी मिल सके। बयान के अनुसार यह जहाज बीच पर फंस गया है और उस पर इंडोनेशिया का झंडा लगा है। उस पर कोई नाविक या सामान नहीं है। दुनियाभर में जहाजों की आवाजाही का ब्यौरा रखने वाली मैरीन टैरिफ वेबसाइट के अनुसार यह जहाज 2001 में बना था।

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