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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भारत-चीन गतिरोध को लेकर संसद में दिए बयान के बाद स्थिति साफ हो गई है कि चीन अभी तक पिछले समझौतों के उल्लंघन ही करता रहा है। हालाँकि, राजनाथ सिंह ने साफ़ तौर पर कहा था कि सीमा पर तनाव का द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ेगा। भारत सरकार ने चीन से तनाव के बाद कई चीनी ऐप पर प्रतिबंध भी लगा दिया है। कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि लद्दाख में भारत-चीन के बीच सीमा विवाद में महीनों बीत जाने के बाद भी कोई कमी नहीं आई है। चार दशक से भी ज्यादा समय बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पिछले दिनों गोलीबारी हुई।

अब सामने आया है कि भारत-चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर पिछले 20 दिनों में कम से कम तीन बार फायरिंग की घटना हो चुकी है। सैन्य सूत्रों के अनुसार, सबसे पहली घटना तब घटी जब दक्षिणी पैंगोंग की ऊंचाई वाली चोटी पर कब्जा करने की चीन ने कोशिश की। इस दौरान, भारत ने चीन के सैनिकों को वापस खदेड़ते हुए उनकी चाल को नाकाम कर दिया। यह घटना 29-31 अगस्त के बीच हुई। इसके बाद दूसरी घटना सात सितंबर की है, जोकि मुखपारी की चोटियों पर घटी थी।

सूत्रों ने आगे बताया कि तीसरी घटना आठ सितंबर को पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर हुई थी। इस दौरान, दोनों ही पक्षों के जवानों ने 100 राउंड से ज्यादा फायरिंग की थी। यह गोलीबारी इसलिए हुई क्योंकि चीनी पक्ष काफी आक्रामकता दिखा रहा था। इन सभी फायरिंग की घटनाओं के बाद, भारत और चीन के विदेश मंत्रियों (एस. जयशंकर और वांग यी) के बीच रूस के मॉस्को में शंघाई सहयोग संगठन से इतर बैठक हुई थी। दोनों ही विदेश मंत्रियों ने सीमा पर अप्रैल से जारी तनातनी पर बातचीत की थी और तनाव को कम करने पर राजी हुए थे।

चीन से जारी तनाव के बीच आज प्रधानंमत्री ने देश के सभी राजनैतिक दलों की सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में कई बाते साफ होंगी। कांग्रेस ने यह आरोप लगाए हैं कि चीन के मामले पर सरकार बहुत कुछ छुपा रही है। ऐसे में सर्वदलीय बैठक का होना यह बताता है कि सरकार सबकी सुनने और अपनी कहने को तैयार है।

अप्रैल महीने से शुरू हुए एलएसी पर तनाव के बाद कई बार भारत और चीन के सैनिकों का आमना-सामना हो चुका है। लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून को दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। इस झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे, जबकि चीन के सैनिकों को भी अच्छा खासा नुकसान पहुंचा था। हालांकि, पड़ोसी देश ने कभी भी मारे गए जवानों की वास्तविक संख्या की जानकारी नहीं दी है।

सीमा पर जबसे दोनों देशों के बीच तनाव के हालात हैं, तभी से दोनों पक्षों ने कई बार वार्ताएं की हैं। तनाव कम करने को लेकर सैन्य और राजनयिक दोनों स्तर पर बातचीत हो चुकी है। हालांकि, शुरुआती समय में कुछ हद तक बातचीत थोड़ी बहुत सफल हुई, जब चीनी सैनिक कुछ इलाकों से पीछे हटे, लेकिन एक बार फिर से चीनी सैनिकों ने पैंगोंग और कुछ अन्य इलाकों से पीछे हटने को मना कर दिया था। ऐसे में दोनों ही स्तर की वार्ताएं पूरी तरह से सफल नहीं हो सकीं और तनाव में लगातार बढ़ोतरी जारी है। अब भारतीय सेना लद्दाख में लंबे समय तक रुकने के लिए पूरी तरह से तैयार है। 

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