आम को लोग फलों का राजा कहते हैं,मौसम में इस फल को खाना लोग बेहद पसंद करते है। चाहे बच्चे हों या बूढ़े सबका प्रिय फल होता है आम। आजकल बाजारो में आम की कई नस्लें पाई जा रही है। लोगों को खूब पसंद भी आ रहा है। कई अलग अलग प्रकार के नाम दें दिए गए है जैसे- लाल ,दसहरी,लंगड़ा, पिपाल आदि जैसे नाम से बाजार में बिक रहा है।

मगर कुछ एसी ही कहानी है यूपी के सहारनपुर जिले की जहां एक आम का 15 साल पुराना पेड़ अपने आमों के लिए प्रसिद्ध है। यह पेड़ सहारनपुर की चर्चित बाग कंपनी ने लगाया था और उस बाग में आम का पेड़ लगाने का यह उदेश्य था कि नए किस्म के आम को विकसित करना और उनके स्वाद के साथ प्रयोग करना था।

सहारनपुर के बागवानी एंव प्रशिक्षण केद्रं संयुक्त निर्देशक भानु प्रकाश राम के अनुसार कंपनी में करीब पांच साल पहले यह अनुठा प्रयोग किया गया था। प्रयाग करने का यह उदेश्य था कि आम के नए नस्ल को खोजा जाए। आम अत्पादन में सहारनपुर पहले से ही अग्रणी नाम रहा है। यहां बड़े पैमाने पर फल पट्टी में आम की बागवानी बड़े मात्रा में की जाती है।

जिससे इस जगह पर आम के नए नस्ल की खोज आसानी से हो जाती है। बागवानी केंद्र के तत्कालीन संयुक्त निर्देशक राम जी के अनुसार राजेश सिंह द्वारा 121 प्रकार के आमों को एक पेड़ पर लगाया गया है। उन्होंने और बताया कि हम नई प्रजातियों पर काम कर रहे है। ताकि और बेहतर प्रकार के आम का उत्पादन किया जा सके।

इस तकनीक को आम लोग भी बड़े आसानी से उपयोग कर सकते है। राम जी ने बताया कि जिस पेड़ को चुना गया है शोध के लिए वह पेड़ लगभग 10 साल पुराना था। वहीं राम जी ने बता की एक देशी आम के पेड़ों पर विभिन्न प्रकार के आमों के शाखा को लगा दिया जाता है। जिसको बाद इस पेड़ की देखरेख के लिए नर्सरी प्रभारी को चुना जाती है ताकि इस पेड़ की देखभाल हो सके। फिर इस पेड़ की सभी शाखाओं पर विभिन्न प्रकार के आम पाया जाता है।  

हम आपको बता दें की आम की एक एसी प्रजाति है नूरजहां  जो मध्यप्रदेश में पाया जाता है। यह आम आमलोगों के लिए नहीं है। इस प्रजाति के एक आम की कीमत लगभग 1200 रुपये बताया जाता हैं। इसे आमों की रानी के नाम से भी जाना जाता है। यह मध्यप्रदेश के इंदौर शहर से करीब 250 किलोमीटर दूर कट्ठीवाड़ा में इस प्रजाति की खेती की जाती है। नूरजहां आम का औसत वजन 2.75 किलोग्राम तक होता है।

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