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आम आदमी पार्टी की अंदरूनी कलह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। अभी हाल ही में कुमार विश्वास को पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने किसी तरह विश्वास दिलाकर, मनाकर चैन की सांस भी नहीं ली थी कि शनिवार शाम ख़बर आई कि उन्होंने दिल्ली जल मंत्री कपिल मिश्रा को मंत्री पद से हटा दिया है। बस फिर क्या था पार्टी में एक और घमासान शुरू हो गया और विपक्षियों ने उसका मजा लेना शुरू कर दिया।

कपिल मिश्रा को मंत्री पद से हटाए जाने वाले के बाद कपिल ने कल मीडिया से कहा कि वह आज यानि रविवार को एक बड़ा खुलासा करने वाले हैं। रविवार को वो मीडिया के सामने आए और अरविंद केजरीवाल पर बेहद संगीन आरोप लगाए। भ्रष्टाचार पर ज़िरो टॉल्रेंस की नीति पर काम करने का दावा करने वाले अरविंद केजरीवाल पर उन्हीं के नेता कपिल मिश्रा ने भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप लगा डाला।

कपिल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल को सत्येंद्र जैन से 2 करोड़ रूपये लेते हुए देखाष कपिल ने बताया कि जब उन्होंने अरविंद से पूछा कि यह पैसे किसके लिए हैं और कहां से आए तो केजरीवाल ने कहा कि कुछ बात बाद में बताया जाना चाहिए। रविवार को राजघाट पर उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और एलजी अनिल बैजल से भी मुलाकात की। एलजी से मिलने के बाद ट्वीट किया, “चुप रहना असंभव था। एलजी को सब बता दिया। मैंने उन्हें गलत तरीके से पैसे लेते देखा।”

कपिल मिश्रा के दस बड़े बयान

  1. कपिल ने कहा, “मैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर आया, यहां ऊर्जा मिलती है। आम आदमी पार्टी हमारी, कार्यकर्ताओं की पार्टी है।
  2. हमने संघर्ष किया है तब यह पार्टी बनी। इसके लिए लाठी-डंडे खाए हैं। कभी इसे छोड़कर नहीं जाएंगे।
  3. कुछ गंदगी आ गई है उसे बाहर करना है। न मुझे कोई बाहर निकाल सकता है और न मैं इसे छोड़ूंगा।”
  4. “मंत्री बनने के बाद मैंने एक महीने के भीतर शीला दीक्षित के खिलाफ 400 करोड़ के वाटर टैंकर घोटाले की रिपोर्ट तैयार की। उसके बाद क्या हुआ ये सबने देखा। ऐसा नहीं है कि मैं मंत्री पद से हटने के बाद बोल रहा हूं। बोलने के बाद मुझे हटाया गया।”
  5. कैबिनेट का अकेला मंत्री हूं, जिस पर करप्शन का कोई आरोप नहीं लगा। कल जब तक मैंने एंटी करप्शन ब्यूरो को लेटर नहीं लिखा। तब तक पानी की परेशानी की बात क्यों सामने नहीं आई थी?”
  6. “मैं एलजी से मिला। मैंने संविधान की शपथ ली है, तो ये जिम्मेदारी बनती है कि जो मैंने आंखों से देखा, उसे उन्हें बताऊं। हम गड़बड़ी के मामलों की शिकायतों के लिए केजरीवाल पर भरोसा करते थे। चाहे वो रिश्तेदारों को पद देना, मनी लॉन्ड्रिंग या फंड में गड़बड़ी के आरोप हों।
  7. कपिल ने आगे कहा, भरोसा था कि केजरीवाल के रहते पार्टी में कोई बेईमान नहीं हो सकता। जब उनकी नजर में आएगा तो वो सब ठीक कर देंगे। यही उम्मीद हमें दो साल से प्रेरित करती थी।
  8. लेकिन शुक्रवार को मैंने सत्येंद्र जैन को 2 करोड़ रुपए कैश केजरीवाल को देते उनके घर पर देखा। मैंने पूछा- इतना पैसा कहां से आया, ये कैश में क्यों है? इसके सारे कागज सामने रखें, अगर कोई गलती हुई है तो माफी मांगे।
  9. मैंने उनसे कहा- मुझे एसीबी को यह बात बतानी होगी, क्योंकि मैं संवैधानिक पद पर हूं, इसके बाद वहां से चला गया। इस पर जैन ने कहा- राजनीति में कुछ बातें बाद में बताई जाती हैं। जैन ने बताया कि सीएम के रिश्तेदार की 50 करोड़ की लैंड डील करवाई है।
  • कपिल ने कहा, कल तक सब कह रहे थे कि ईवीएम की वजह से एमसीडी चुनाव हारे तो अब अचानक पानी का मुद्दा कहां से आ गया।

मनीष सिसोदिया का बयान

कपिल मिश्रा के इन आरोपों के बाद दिल्ली सरकार की तरफ से उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया मीडिया के सामने आए और वह सीधे तौर भी कुछ भी कहने से बचते दिखे। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से दिल्ली के लोगों को पानी की परेशानी हो रही थी। हमने लोगों के बिल मांफ करवाएं थे लेकिन फिर भी हजारों रुपये के बिल लोगों को आ रहे थे। इन्हीं कारणों की वजह से पार्टी ने जलमंत्री बदलने का और पार्टी में कुछ अन्य फेरबदल करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि कपिल मिश्रा जी ने जल मंत्री पद रहते हुए काफी मेहनत की है लेकिन उनके आरोप बेबुनियाद हैं।

कवि कुमार ने भी अरविंद पर जताया विश्वास

मनीष सिसोदिया के अलावा पार्टी के बड़े नेता और कवि कुमार विश्वास भी अरविंद के पक्ष में आए। उन्होंने कहा कि अरविंद पैसा ले सकता है यह उनका इस देश मे जो घोर विरोधी होगा वो भी नहीं कह सकता। कुमार ने कहा कि मैं उनके साथ 10 साल से हूं, उन्हें अच्छे से जानता हूं वो ऐसा कम कर ही नहीं सकते।

कुमार ने आगे कहा कि कपिल के आरोप बिल्कुल बेबुनियाद हैं और फिरभी उन्हें अगर ऐसी कोई शंका हुई तो उन्हें सभी पार्टी नेता से बात करनी चाहिए थी, आरोपों के प्रमाण तक पहुंचना चाहिए तब ऐसी बात करनी चाहिए थी। केजरीवाल के पक्ष में बोलते हुए कुमार ने कहा कि अरविंद ने तो पहले दिन से ही कह रखा है कि अगर मनीष या मैं कोई भ्रष्टाचार करते हैं तो मैं उन्हें पार्टी से निकाल दूंगा और अगर मैं भ्रष्टाचार करता हूं तो आप सब मुझे निकाल देना। उन्होंने कहा कि हमने पीएसी में संत्येंद्र जैन को बुलाया है और वहीं कपिल मिश्रा पर भी फैसला लिया जाएगा।

उनसे बात करेंगे पूछेंगे कि क्या यह बात सहीं है या गलत या कहीं कोई गलती हुई है। हम हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं जो उचित होगा वहीं करेंगे। इसके बाद कुमार विश्वास ने एक ट्वीट करके पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की वे धैर्य बनाकर रखें। जो सर्वश्रेष्ठ होगा हमसब मिलकर करेंगे।

पुराने साथी योगेंद्र को भी नहीं हुआ भरोसा

मनीष और कुमार के बाद केजरीवाल के पुराने साथी योगेंद्र यादव ने भी अपने साथी पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह भले ही तानाशाही फैला रहें हो, या अवसरवादिता कर रहें हो लेकिन पैसे लेने वाला गंभीर आरोप बिना प्रमाण के उचित नहीं लगता। उन्होंने कहा कि ऐसा आरोप लगाने से पहले प्रमाण को सामने लाने चाहिए। हम पक्ष में हो या विपक्ष में किसी भी नेता पर ऐसे संगीन आरोप बिना प्रमाण के नहीं लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पार्टी में कोई भी सिद्धांतों के लिए बल्कि सत्ता के लिए लड़ रहा है।

बीजेपी ने केजरीवाल से मांगा इस्तीफा

कपिल मिश्रा के इन आरोपों के बाद विपक्ष को एक बार केजरीवाल पर तंज कंसने का मौका मिल गया और दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने केजरीवाल से इस्तीफा मांग लिया। वहीं बीजेपी नेता विजय गोयल ने तो केजरीवाल की गिरफ्तारी तक की मांग कर डाली।

अन्ना ने क्या कहा

उधर अन्ना हजारे अरविंद पर लगे आरोपों से काफी दुखी हैं। अन्ना का कहना है कि केजरीवाल भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़कर ही मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि भरोसा तो उनका उसी दिन टूट गया था जब केजरीवाल के मंत्रियों पर तमाम तरह के संगीन आरोप लग रहे थे और उन्हें इस्तीफा तक देना पड़ रहा था।

बता दें, दिल्ली के जंतर-मंतर पर अन्ना का भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से ही केजरीवाल उभर कर सामने आए थे। जिसके बाद केजरीवाल की अगुवाई में राजनीतिक पार्टी बनाई गई और दिल्ली की सत्ता तक पहुंची है।

क्या केजरीवाल को छोड़नी पड़ेगी कुर्सी…?

लगातार उलझनों में फंसती जा रही केजरीवाल की पार्टी में रोजाना एक नया अध्याय जुड़ रहा हैं। ऐसे में आने वाले समय यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या केजरीवाल अपनी पार्टी की स्थिति को पुन: ठीक कर पाएंगे या उन्हें 67 सीट लाने के बावजूद पांच साल से पहले ही अपनी सत्ता छोड़नी पड़ेगी।

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