अफगानी सैनिकों को अपने लिए खुद ही लड़ना होगा- अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइनड

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विश्व की राजधानी अमेरिकी ने अप्रैल माह में जैसे ही अपनी सेना को वापस बुलाने का ऐलान किया उसके फौरन बादी ही अफगानिस्तान का आतंकी संगठन तालिबान ने वहां के 50 से अधिक जिलों पर कब्जा कर लिया। कब्जे के साथ ही इस्लामिक कानून को लागू कर दिया।

तालिबान अफगानिस्तान के अन्य इलाकों पर कब्जा करते जा रहा है। तालिबान की बढ़ती ताकत को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने मंगलवार को कहा कि पिछले कुछ सप्ताह में जिस तरह से अफगानिस्तान के कई शहरों में तालिबान काबिज हो रहा है उसे देखते हुए वहां की सेना को अपनी लड़ाई स्वयं लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के अपने फैसले पर उन्हें किसी तरह का पछतावा नहीं है। 

व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाइडन ने कहा, ‘हमने 20 सालों में अरबों रुपये खर्च किए। 300,000 से अधिक अफगान के सैनिकों को हमने आधुनिक हथियारों के साथ प्रशिक्षित किया और अब अफगान के नेताओं को एकजुट होना होगा। उन्हें अपने लिए और देश के लिए लड़ना होगा।’

बाइडन ने वहां के एयरफोर्स के संचालन पर जोर दिया और कहा, ‘अमेरिका की ओर से अफगान सेना को लगातार हथियारों, भेजन समेत अन्य सहयोग भी मिलता रहेगा।’ अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने बताया कि 95 फीसद से अधिक सेनाओं की वापसी हो चुकी है। पिछले सोमवार को अफगान के राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ गनी ने संसद में कहा था कि हालात को बदलने के लिए काबुल के पास 6 महीने की सुरक्षा योजना थी। उन्होंने हालात खराब होने का आरोप अमेरिकी सेना की वापसी पर लगाया।

अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने बताया था कि अफगानिस्तान मेंसुरक्षा हालात अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिकी सैनिकों के जाने के बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी को अमेरिकी राजनयिक और मानवीय समर्थन का आश्वासन दिया है। 

जो बाइडेन सरकार ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुला लिया है। यह खबर वहां की महिलाओं के लिए सबसे अधिक दु:ख विदारक रही। 1980 के बाद से वस्तु की तहर जिंदगी गुजार रही महिलाओं के लिए अमेरिका उम्मीद की किरण बनकर आया था लेकिन एक बार फिर अफगानी महिलाओं की जिंदगी से रौशनी दूर जा रही है।

तालिबानी कानून के अनुसार, कोई महिला अकेले घर के बाहर नहीं जाएगी, शिक्षा से रिस्ता खत्म करना होगा, फैशन से दूरी बनानी होगी। कहते हैं जब किसी देश में सत्ता में फेर बदल होता है तो महिलाओं को सबसे पहले शिकार बनाया जाता है। इस कहावत की तस्वीर अफगानिस्तान में दिख रही है।

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2001 में अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान आने से पहले तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान में जंगल राज कायम कर दिया था और नियमों का उल्लंघन करने वालों को जलील किया जाता था। महिलाओं को सड़कों पर मारा जाता था, और तालिबान कि इस्लामी पुलिस महिलाओं पर सख्ती से तालिबानी कानून लागू करती थी।

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