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अमेरिका की चेतावनी के बाद भारत और रूस ने अपने विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक संबंधों को बहुआयामी विस्तार देते हुए एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम करार पर दस्तखत कर दिया है। भारत ने एस-400 समेत आठ करारों के सौदे पर आज हस्ताक्षर किये तथा आतंकवाद से मुकाबले, जलवायु परिवर्तन और हिन्द प्रशांत क्षेत्र में परस्पर तालमेल बढ़ाने के दृढ़ इरादे का इज़हार किया। दोनों देशों के बीच हाइड्रो कॉर्बन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और रूस के सखालिन से भारत को आपूर्ति बढ़ाने की भी सहमति कायम हुई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 19वीं भारत रूस वार्षिक शिखर बैठक के दौरान ये फैसले लिए गये। दोनों देशों के बीच जिन आठ करारों पर हस्ताक्षर किये गये उनमें परामर्श के प्रोटोकॉल को विस्तार देने, नीति आयोग एवं रूस के आर्थिक सहयोग मंत्रालय के बीच सहयोग, अंतरिक्ष के क्षेत्र में इसरो एवं रोसकास्मॉस के बीच सहयोग, रेलवे, परमाणु, परिवहन शिक्षा और लघु उद्योगों के क्षेत्रों में सहयोग के करार शामिल हैं। खाद के क्षेत्र में इंडियन पोटाश लिमिटेड और फोसएग्रो के बीच समझौते पर भी दस्तखत हुए हैं।

बैठक के बाद मोदी और पुतिन के वक्तव्यों में एस-400 मिसाइल प्रणाली के सौदे पर कुछ नहीं कहा गया। लेकिन बाद में जारी संयुक्त वक्तव्य में इस बहुचर्चित सौदे पर अंतिम मुहर लगने की जानकारी दी गयी। मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत एवं रूस के बीच मानव संसाधन विकास से लेकर प्राकृतिक संसाधन तक, व्यापार से लेकर निवेश, नाभिकीय ऊर्जा के शान्तिपूर्ण सहयोग से लेकर सौर ऊर्जा , तकनीक से लेकर बाघ संरक्षण, सागर से लेकर अंन्तरिक्ष तक सम्बन्धों को और व्यापक बनाया जायेगा।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद के विरूद्ध संघर्ष, अफगानिस्तान तथा हिन्द-प्रशांत के घटनाक्रम, जलवायु परिवर्तन, शंघाई सहयोग संगठन, ब्रिक्स जैसे संगठनों एवं जी-20 तथा आसियान जैसे संगठनों में सहयोग करने में हमारे दोनों देशों के साझा हित हैं। हम अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अपने लाभप्रद सहयोग को जारी रखने पर सहमत हुए हैं। उन्होंने कहा, “भारत- रूस मैत्री अपने आप में अनूठी है। इस विशिष्ट रिश्ते के लिए पुतिन की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता से इन संबंधों को और भी ऊर्जा मिलेगी। और हमारे बीच प्रगाढ़ मैत्री और सुदृढ़ होगी और हमारी विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को नई बुलंदियां प्राप्त होंगी।”

इस अवसर पर मौजूद रुस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम ओरेशकिन ने कहा कि भारत के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिये रुस एक नीति तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि रुस दोनों पक्षों के बीच निवेश संरक्षण के उपाय, दोहरे कराधान से बचाव और राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।

आपको बता दें कि यह सौदा अमेरिका की उस चेतावनी के बावजूद किया गया है जिसमें रूस से हथियार खरीदने पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की बात कही गयी है। अमेरिका ने कहा था कि वह भारत पर ‘काट्सा’ यानी ‘काउंटरिंग अमेरिका एडवसरिज थ्रू सेंक्शंस एक्ट ‘ के तहत आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है। इस कानून में प्रावधान है कि यदि कोई भी देश रूस , ईरान या उत्तर कोरिया से हथियारों की खरीद करता है तो उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पडेगा।

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