मंगलवार 27 जुलाई यानी आज श्रावण गणेश चतुर्थी व्रत है। माता-पिता को सर्वाधिक प्रतिष्ठा गणेशजी ने दी है। भगवान गणेश को विवेक कहते है। ‘विद्यावरिधि बुद्धिविधाता’ कहते है। ‘शोकविनाशकारकम’ कहते हैं। गणेश प्रथम पूज्य होते है।

सही मायने में जिसके पास विवेक होगा, उसी को सनातन धर्म के अनुसार दुर्गा-आदिशक्ति, सूर्य, शिव और नारायण आदि पंचदेवों की अक्षुण्ण ऊर्जा की प्राप्ती होगी। अपने प्रिय भक्त राजा वरेण्य से गणेश गीता में गणेशजी कहा जाता हैं।

शिवे विष्णौ च शक्तौ च सूर्ये मयि नराधिप। याऽभेदबुद्धिर्योग: स सम्यग्योगो मतो मम।।
अहमेव जगद्यस्मात्सृजामि पालयामि च। कृत्वा नानाविधं वेषं संहरामि स्वलीलया॥

अर्थात श्री शिव, विष्णु, शक्ति, सूर्य और मुझ गणेश में जो अभेदबुद्धिरूप योग है, उसी को मैं सम्यक योग मानता हूं, क्योंकि मैं ही नाना प्रकार के वेश धारण करके अपनी लीला से जगत की सृष्टि, पालन और संहार करता हूं।

श्रावण कृष्ण चतुर्थी व्रत के बारे में बोला जाता है कि जब माता पार्वती, शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए तप कर रही थीं और शिवजी प्रसन्न नहीं हो रहे थे, तब उन्होंने यह व्रत अपनााया था। व्रत करने के बाद ही उनका शिव से विवाह हो गया। हनुमान जी ने माता सीता की खोज में सफलता के लिए यह व्रत किया था। रावण को जब राजा बलि ने कैद कर लिया था, तब रावण ने यह व्रत किया था। ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या ने भी इस व्रत को अपनाया था।

यह व्रत मंगलवार को पड़ता है तो शुभ माना जाना है। व्रत करने के समय 21 दूब जरूर चढ़ाएं, शमी और बेलपत्र के साथ। साथ ही घी, गेहूं और गुड़ से बने 21 मोदक भी गणेश जी को अपर्ण करना चाहिए। निराहार रह कर पूजा रात में चंद्रमा के उदय होने पर ही करें। उदित चंद्रमा, गणेश और चतुर्थी माता को अर्ध्य अवश्य दें। गणेश जी को तीन, तिथि के लिए तीन और चंद्रमा के लिए सात अर्घ्य देने चाहिए। शुक्ल पक्ष चतुर्थी में केवल गणेश, तिथि और चंद्रमा को एक-एक बार जल देना चाहिए। अर्घ्य देने के बाद मोदक खा सकते हैं। मीठा भोजन लें।

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