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जिस तरह से कोरोना ने पांव पसारे हैं, पूरी दुनिया परेशान है। चीन के फैलाये इस वायरस का अपने देश भारत में रफ्तार तबलीगी जमात के मजलिस से पहले तक काफी कम रही। लेकिन कोरोना के खतरे के बावजूद निजामुद्दीन के मरकज में देश विदेश के हजारों लोग जुटे। यहीं से फिर लोग देश के कोने कोने में फैले, जिसकी वजह से भारत में भी कोरोना बड़ा बलवाई हो गया है।

देश की अधिकांश जनता निम्न आय वर्ग की है। सवाल यह था कि किसी को कोरोना हो तो टेस्ट कैसे कराए….प्राइवेट लैब कोरोना टेस्टिंग के लिए काफी मोटी रकम मांग रहे हैं। ऐसे में इसी के मद्देनजर और इसकी चिकित्सा में लगे मेडिकल स्टॉफ के लिए सुरक्षा की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की गई थी। कोरोना मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने डॉक्टरों को योद्धा बताते हुए उनके सुरक्षा के इतंजाम करने को भी कहा। सुप्रीम कोर्ट  ने कहा कि सरकार कोरोना टेस्ट  की जांच मुफ्त में कराने का इतंजाम करे। शीर्ष अदालत ने कहा कि निजी लैब भी कोरोना टेस्ट के लिए ज्यादा पैसे न वसूलें। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि कोरोना टेस्ट के रिम्बर्समेंट के लिए सरकार एक तंत्र बनाए।

सरकार की तरफ से पश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि केंद्र सरकार कोरोना से निपटने के लिए अहम कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि PPE किट का तेजी से इंतजाम किया जा रहा है। इसके अलावा पॉजिटिव लोग किसी को प्रभावित न करें, इसका भी ख्याल रखा जा रहा है। मेहता ने डॉक्टरों के वेतन से पैसे काटने की बात को गलत बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों एवं प्राइवेट डॉक्टर्स के वेतन में किसी भी प्रकार की कटौती न करने को कहा है।

कोरोना पर आज सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों के सुरक्षा के लिए भी इंतजाम होने चाहिए। कोर्ट ने कहा, ‘कोरोना के बीच डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा अहम है। ये योद्धा हैं और उनकी तथा उनके परिवार की सुरक्षा बेहद जरूरी है। बता दें कि अस्पताल में भर्ती तबलीगी जमात के लोगों द्वारा डॉक्टरों और नर्सों के साथ बदसलूकी की लगातार खबरें आ रही हैं। केंद्र सरकार ने बताया कि सरकार सभी हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए है, और इसे खत्म करने के लिए प्रयास जारी है।

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