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New Delhi: कहते हैं ना कि अगर किसी इंसान में कुछ करने की चाह हो तो कुछ भी करना मुश्किल नहीं होता। खासतौर से जब काम भगवान को समर्पित हो तो कुछ भी करना मुश्किल नहीं होता। जयपुर के एक कलाकार हैं शरद माथुर जिन्होंने 3000 पन्नों की रामचरितमनास लिखी है उन्होंने इस बात को सच साबित कर दिखाया है, ये रामचरितमानस 21 संस्करणों में फैली है और करीबन 150 किलो की है। शरद ने इस रामचरितमानस को ऑयल पेंट और ब्रश से बनाया है।

लेकिन उनकी ये तपस्या इतनी आसानी से पूरी नहीं हुई इसे पूरा करने में उन्हें पूरे 6 सालों का लंबा वक्त लगा है, सबसे खास बात ये है कि ये इसे राममंदिर को दान करना चाहते हैं। चाहे जब भी राम मंदिर बने।

शरद ने बताया कि यह सब 2013 में शुरू हुआ जब मैंने पहले ‘सुंदर कांड’ को बड़े फोंट आकार में लिखने का फैसला किया क्योंकि बहुत से लोगों को छोटे-छोटे फोंट पढ़ने में परेशानी होती है। मैंने रोजाना दो पेज लिखे और हर दिन मुझे 3-5 घंटे का समय लगा। मैंने लगभग छह साल तक लगातार काम किया।

उन्होंने कहा कि मेरी इच्छा है कि जब भी अयोध्या में राम मंदिर बने मैं इस पुस्तक को दान करूं। शरद ने बताया कि मैंने छह साल तक इस पर काम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुझे ये पुस्तक अयोध्या में राम मंदिर को समर्पित करने में मदद करनी चाहिए। मैं चाहता हूं कि मेरे हाथ से लिखी रामचरितमानस को वहां रखा जाए।

उनकी इस रामचरितमानस के 100 से 200 पन्ने नष्ट भी हो चुके हैं और अब इसलिए उन्होंने सभी पन्नों को लेमिनेट करा लिया है। अपनी रोजीरोटी कमाने के लिए वो संगीत पढ़ाते हैं उन्होंने बताया कि समाज की तरफ से कोई आर्थिक समर्थन तो नहीं था लेकिन नैतिक समर्थन हमेशा रहा।

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