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रामजन्म मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर 17 नवंबर से पहले किसी भी दिन फैसला आ सकता है। 16 अक्टूबर को मामले की सुनावई पूरी हो चुकी है और देश सांस रोके फैसले का इंतजार कर रहा है। अयोध्या में इस वक्त अजीब सी बेचैनी छाई हुई है। अयोध्या भले ही बाहर से खामोश दिख रहा हो लेकिन रामनगरी में अजीब सी हलचल महसूस की जा सकती है। जिस विवाद ने सैकडों सालों से अयोध्या को परेशान किया है उस पर अब फैसला आने वाला है। फैसला क्या होगा। फैसले के बाद क्या होगी अयोध्या की तस्वीर, क्या इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट मुहर लगाएगा, या सबसे अलग होगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला, क्या हिन्दू-मुस्लिम स्वीकार करेंगे अयोध्या पर सुप्रीम फैसला ?  ये वो सवाल हैं जो देश के साथ-साथ अयोध्या को भी परेशान कर रहें हैं।

राम मंदिर पर सुप्रीम फैसले का इंतजार कर रहे अयोध्या के लोगों का कहना है कि फैसले को लेकर थोड़ी आशंका जरूर है लेकिन ‘इन सबके बावजूद अयोध्या के लोगों को एक-दूसरे से कभी परेशानी नहीं हुई। परेशानी तब होती है जब भीड़ बाहर से आती है। ऐसे में प्रशासन बाहर से आने वाले लोगों पर पैनी नजर रख रहा है।

अयोध्या में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में अस्थाई जेल बनाने के लिए कई स्कूलों को चिह्नित किया गया है। फैसले के बाद अयोध्या से जुड़ी जिले की सीमाएं सील करने की भी पूरी तैयारी है। अयोध्या विवाद के फैसले को लेकर पुलिस समेत अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों को 24 घंटे अपने-अपने क्षेत्र पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है। एहतियात के तौर पर छह सुपर जोनल, पांच जोनल और 22 सेक्टर मजिस्ट्रेट को नामित करते हुए क्षेत्र का बंटवारा किया गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी संख्या में अर्द्धसैनिक बलों को भेजा गया है। फैसले के मद्देनजर सोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए एक कमिटी गठित की गई है। सोशल मीडिया पर भड़काऊ और आपत्तिजनक मैसेज पोस्ट, शेयर, लाइक करने से बचने की लोगों को सलाह दी जा रही है।

इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले के मद्देनजर अपने कैबिनेट सहयोगियों से इस मुद्दे पर अनावश्यक बयानबाजी से बचने और देश में सद्भाव बनाए रखने को कहा है। हाल ही में ‘मन की बात’ में भी पीएम मोदी ने 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अयोध्या मामले पर आए फैसले के बाद सरकार, राजनीतिक दलों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा अराजकता और हिंसा को रोकने के लिए उठाए गए कदमों और कोशिशों को याद किया था।

और अब एक बार फिर कैबिनेट मंत्रियों की बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है। ऐसे में देश में सद्भाव और शांति बनाए रखने की हम सभी की जिम्मेदारी है। इस मुद्दे पर सभी को अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस फैसले को हार और जीत के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए।

वहीं, आरएसएस ने तय किया है कि वो अयोध्या फैसले से पहले लेफ्ट पार्टियों, तृणमूल कांग्रेस, सपा और आरजेडी समेत अन्य पार्टियों के साथ बात करेगा। इसके अलावा संघ, मुस्लिम सांसदों और विधायकों से भी चर्चा करेगा। इससे पहले 5 नवंबर को भी संघ और बीजेपी नेताओं ने कई मुस्लिम धर्मगुरुओं और नेताओं से मुलाकात की थी। बैठक में ये तय हुआ कि, जो भी फैसला आएगा, वो किसी की ना तो जीत होगी और ना ही किसी की हार इसे धर्म से भी जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

अब किसी भी दिन आजाद भारत का सबसे बड़ा फैसला आ सकता है, जिस फैसले का देश को पिछले 70 सालों से इंतजार था वो घड़ी आ चुकी है। फैसले का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और देश सांस रोके फैसले का इंतजार कर रहा है। ये देश गंगा-यमुना की तहजीब वाला देश है और सैकड़ों सालों से आपसी सदभाव ही इसकी पहचान है। ऐसे में देश यही उम्मीद कर रहा है कि फैसला किसी के भी पक्ष में आए लेकिन हमारी साझी संस्कृति पर कोई आंच ना आए

पीयूष रंजन

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