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देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। 2014 की मोदी लहर में बही कांग्रेस का आलम ये रहा, कि पार्टी लगातार कमजोर होती चली गई। हार-दर-हार कांग्रेस का मनोबल कुछ इस तरह से टूट रहा है कि पार्टी के दिग्गज नेताओं को भी लगने लगा है कि इन हालात में पार्टी की जीत की संभावनाएं ना के बराबर हैं। कभी पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए गए, तो कभी करीबी नेताओं की मनमानी पर। महाराष्ट्र और हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के कई नेता बगावत पर उतर आए, तो कई नेताओं ने पार्टी को बाय-बाय कहने में ही अपनी भलाई समझी।

महाराष्ट्र कांग्रेस के बड़े नेता संजय निरुपम के अल्टीमेटम औऱ हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर का ये आरोप लगाते हुए पार्टी को अलविदा कहना कि राहुल गांधी के करीबी नेताओं को साइड-लाइन किया जा रहा है। इन आरोपों से कांग्रेस उबर भी नहीं पाई थी कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने ये कहकर कांग्रेस हाईकमान की बेचैनी बढ़ा दी है कि मौजूदा हालात को देखकर नहीं लगता कि कांग्रेस चुनाव में जीत दर्ज कर पाएगी।

दरअसल, सलमान खुर्शीद का कहना है कि लोकसभा चुनाव में मिली हार का विश्लेषण ना होना और राहुल गांधी का अध्यक्ष पद छोड़ना कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं है। हालांकि बीजेपी सलमान खुर्शीद के बयान को एक मौके के तौर पर भुना रही है। बीजेपी को लगता है कि चुनाव नतीजों से पहले सलमान खुर्शीद का ये बयान, हार स्वीकारने जैसा ही है।

कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद।

उधर, कांग्रेस के नेता राशिद अल्वी ने सलमान खुर्शीद के बयान पर पलटवार करते हुए ये कह दिया कि “घर को आग लग गई, अपने ही चिराग से”। भले ही राशिद अल्वी का निशाना सलमान खुर्शीद के बयान पर होस लेकिन अल्वी के इस बयान को राहुल गांधी से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

ऐसे में अब सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि इन हालातों में कांग्रेस कैसे दोबारा उठ खड़ी होगी। क्या लोकसभा चुनाव में मिली हार से कांग्रेस ने अभी भी सबक नहीं लिया है। आखिर क्या वजह है कि कांग्रेस के नेता, एक-एक कर या तो पार्टी को छोड़ रहे हैं या फिर बगावत पर अमादा हैं। ऐसे में क्या ये मान लिया जाए कि कांग्रेस के लिए विरोधी दल उतना बड़ा खतरा नहीं हैं, जितना खुद कांग्रेसी नेता अपनी पार्टी के लिए बन रहे हैं।

ऐसे में कांग्रेस की हालत को देखकर फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि “राह नहीं आसां…बस इतना समझ लीजे…एक आग का दरिया है और डूब के जाना है”।

-अक्षय सिंह गौर

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