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कश्मीर मुद्दे पर दुनियाभर से मिली मात के बाद अब पाकिस्तानी मंसूबे पर मौसम की मार पड़ने वाली है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से वहां जन जीवन सामान्य हो रहा है लेकिन पाकिस्तान को कश्मीर की शांति अखर रही है। पाकिस्तान की कोशिश है कि कश्मीर में अपने आतंकियों के भेज कर अशांति फैलाई जाए लेकिन पहले तो पाकिस्तानी मंसूबे के आड़े भारतीय सेना आई, अब पाकिस्तान के सामने दोहरी मुसीबत आने वाली है। पाकिस्तान के पालतू आतंकियों पर सेना के साथ-साथ कुदरत भी कहर बन कर टूटने वाली है। नवंबर से कश्मीर घाटी में बर्फबारी शुरू हो जाएगी। बर्फबारी के बीच सीमा पर घुसपैठ करना आसान नहीं होगा। पाकिस्तान के पालतू आतंकियों को अब सेना और बर्फबारी दोनों की मार से बचना होगा। आने वाले दिनों में कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में बिछी बर्फ की चादर आतंकियों के लिए सफेद कफन बन जाएगी। एक तरफ बर्फ मौत बन कर बरसेगी, दूसरी तरफ भारतीय सेना की गोलियों से आतंकियों को ऐसी ठंडी मौत मिलेगी कि पाकिस्तान के सारे मंसूबे बर्फ की तरह जम जाएगें।

ये वो परिस्थितियां हैं जिनकी कल्पना करके पाकिस्तान सिहर उठता है। जैसे-जैसे अक्टूबर गुजर रहा है और नवंबर करीब आ रहा है, पाकिस्तानी पीएम इमरान खान की घड़कनें भी बढ़ती जा रही है। परेशान पाकिस्तानी सेना रावलपिंडी में लगातार बैठकें कर रही है। बर्फबारी से पहले आतंकियों को सीमापार घुसपैठ कराने की रणनीति बन रही हैं। पाक सेनाध्यक्ष बाजवा अपने शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ बैठकर घंटों सिर खपा रहे हैं। योजना है कि किसी भी तरह से लॉन्चिंग पैड में बैठे आतंकियों को कश्मीर में बर्फबारी से पहले घुसपैठ करा दिया जाए, ताकि ये आतंकी कश्मीर में आतंक का तांडव मचा सके।

सर्दियों में कश्मीर में जिस तरह से भीषण बर्फबारी होती है कि उस वक्त घुसपैठ करना जानलेवा होता है। ऐसे में बर्फबारी शुरू होने से पहले ही आतंकियों को घुसपैठ में मदद के लिए पाकिस्तान सेना की ओर से लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर उन्हें कवर फायर दिया जा रहा है। यही वजह है कि पिछले दो महीने से लगातार वास्तविक नियंत्रण रेखा पर से गोलाबारी हो रही है। एक बार पाकिस्तानी आतंकी कश्मीर घाटी में घुसपैठ करने में कामयाब हो जाएंगे तो उनके लिए सर्दियों के मौसम में भारत में आतंक फैलाना बेहद आसान हो जाएगा। दुनिय़ा के सामने खुद को आतंकियों का सरपरस्त कबूल कर चुका पाकिस्तान अब फिर से आतंकियों को भारत घुसपैठ कराने की साजिश रचने में दिन रात लगा है।

पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा यानी एलओसी पर 20 टेरर कैंप और इतने ही लॉन्च पैड एक्टिव कर दिए हैं। उसका मकसद सर्दियों के पहले आतंकियों की भारत में घुसपैठ कराना है। रिपोर्ट के मुताबिक, हर आतंकी कैम्प और लॉन्च पैड में कम से कम 50 आतंकी मौजूद हैं। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद ये तमाम कैम्प बंद कर दिए गए थे। लेकिन, अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। लिहाजा, उसने सर्दी शुरू होने से पहले घुसपैठ के लिए बड़ी साजिश रची है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद से अब तक पाकिस्तान की किसी भी तरह की कोई साजिश कामयाब नहीं हो पाई है। ऐसे में अगर अगले कुछ दिनों में पाकिस्तान अपने आतंकी मंसूबे में कामयाब नहीं हुआ तो फिर मार्च तक उसके लिए आतंकियों का घुसपैठ कराना बेहद मुश्किल हो जाएगा। कुछ ही दिनों बाद घाटी में बर्फबारी दस्तक देगी। इन हालात में घुसपैठ बेहद मुश्किल हो जाता है, इसलिए  सर्दियां शुरू होने से पहले पाकिस्तान आतंकियों को भारत में भेजने की साजिश रच रहा है। इसके लिए पाकिस्तान उन रास्तों से आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहा है, जहां से घुसपैठ कराना सबसे आसान रहा है

आतंकिय़ों के लिए कुपवाड़ा, बांदीपोर और बारामुला घुसपैठ के लिए सबसे मुफीद जगह है। काबोल गली, सरदारी, सोनार, केल, रत्ता पानी, शारदी, तेजियान, डुंडियाल, अथ्मुकम, कटवाड़ा, जूरा और लीपा घाटी के रास्ते भी बड़ी तादाद में आतंकी घुसपैठ करते हैं। वहीं लोकुट बंगुस और बोड बंगुस होते हुए जंगल के रास्ते भी घुसपैठ होती है। काजीनाग के पटनी बहक से बारामुला के राफियाबाद जिले की ओर खाफी तादाद में आतंकी घुसपैठ की कोशिश होती रही है। इतना ही नहीं, कमलकोट के रास्ते लाछीपुरा, नाम्बला के जंगलों से घरकोट और फतेहवाली बहक से छोरकुद तक आतंकियों के लिए घुसपैठ का आसान रास्ता है। ये वो दुर्गम इलाके हैं जहां हर वक्त निगरानी करना आसान नहीं होता है ऐसे में आतंकियों के लिए ये इलाके स्वर्ग की तरह हैं।

इसके अलावा कुछ और भी रास्ते है जो भारत में आतंकियों के घुसपैठ के लिए बेहद नमुफीद जगह है इसमें गुरेज का इलाका शामिल है, इसके सामने पीओके का स्कार्दू इलाका है, यहां पर आतंकियों का लॉन्चिंग पैड और कैंप भी है। यहां से लगातार घुसपैठ की कोशिश चलती रहती है। ऐसे में सेना की जरा सी नजर हटी कि आतंकी अपने मंसूबे में कामयाब हो जाते हैं।

वहीं पीओके के चकोठी इलाके के ठीक सामने उरी सेक्टर है, इस क्षेत्र में भी कई आतंकी कैंप हैं और यहां से भी आतंकी लगातार घुसपैठ की फिराक में रहते हैं।

सेना की मुश्किल यही है कि इन 40-50 जगहों से होने वाली घुसपैठ को रोकना आसान नहीं है। पाकिस्तानी सेना से प्रशिक्षित आतंकी किसी भी परिस्थिति से निपटने में माहिर होते हैं। ये आतंकी कड़ी सुरक्षा के बीच कटीली बाड़ के नीचे से भी निकल कर भारतीय सीमा में घुसपैठ कर जाते है तो समझा जा सकता है कि जिन इलाकों में बाड़ नहीं है वहीं क्या स्थिति होती होगी।  भारत और पाकिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 130 प्वाइंट ऐसे है, जहां बाड़ लगाना संभव नहीं। सीमा से जुड़ी नदियों और नालों पर बाड़ बनाना संभव नहीं है। इसका फायदा आतंकी उठाते हैं। सांबा, गुरदासपुर और पठानकोट में आतंकी इसी रास्ते से घुसे थे।

गर्मियों के मौसम में ये इलाके आतंकियों के लिए स्वर्ग है लेकिन सर्दियों में जब बर्फबारी होती है तो इन रास्तों से होकर घुसपैठ करना आसान नहीं होता है। यानि अगला कुछ महीना पाकिस्तान के पालतू आतंकियों के लिए आसान नहीं रहने वाले है। नवंबर महीने से कश्मीर घाटी में बर्फबारी शुरू हो जाएगी। सीमा पर भीषण बर्फबारी होगी। इन बर्फबारी के बीच से निकलना मौत को बुलावा देने के समान होगा। ऐसे में कश्मीर में आतंक फैलाने के लिए आतुर पाकिस्तान परेशान है। कश्मीर में लगी पाबंदी धीरे-धीरे खत्म हो रही है। 95 फीसदी इलाकों से पाबंदी हटा दी गई है। करीब 70 दिनों के बाद सोमवार को घाटी में फोन की घंटी बजी है। पाकिस्तान के लिए कश्मीर में आतंक फैलाने का ये मुफीद मौका है लेकिन जिस तरह से चंद दिनों में सर्दी का मौसम और फिर बर्फबारी शुरू होने वाली है। इससे पाकिस्तान परेशान है।

एक तो मौसम की मार पड़ने वाली है दूसरी तरफ भारतीय सेना की मुस्तैदी पाकिस्तान के आतंक की कमर को तोड़ रही है, लेकिन पाकिस्तान तमाम विपरित परिस्थितियों के बावजूद कश्मीर में आतंक फैलाने की कोशिश में जुटा है। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने हाल ही में कुछ कोड वर्ड्स का खुलासा किया है, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना और वहां की कई आतंकवादी समूहों द्वारा जम्मू और कश्मीर के आंतकवादियों से संपर्क साधने के लिए किया जा रहा था, ताकि क्षेत्र में हिंसा फैलाई जा सके, जानकारी के मुताबिक ये कोड वर्ड्स पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास लगाए गए एफएम ट्रांसमिशन के जरिए भेजे जाते हैं,

जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के लिए 66/88, लश्कर-ए-तैयबा के लिए ए-और अल बद्र के लिए डी-कोड रखे गए हैं।

पाक सेना पाकिस्तान के राष्ट्रगान ‘कौमी तराना’  के जरिए संपर्क कर रही है, ‘कौमी तराना’ के कई संस्करणों का बहुत सक्रियता से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे पाकिस्तानी सेना और आतंकवादी समूहों द्वारा एफएम ट्रांसमिशन स्टेशनों के माध्यम से जम्मू और कश्मीर के अपने हैंडलर्स और कैडर्स को भेजा जा रहा है।

एलओसी के नजदीक आतंकवादियों द्वारा वीएफएफ संदेश भेज कर भारतीय सीमा के आसपास के गांव वालों को गुमराह कर हिंसा फैलाने के लिए उकसाया जा रहा है।

वहीं भारतीय सेना की कड़ी निगरानी से बचना पाकिस्तान के लिए आसान नहीं हो रहा है, लेकिन पाकिस्तान भी लगातार चाल पर चाल चल रहा है। कश्मीर में घुसपैठ में मिली नाकामी के बाद पाकिस्तान ने हाल के दिनों में पंजाब सीमा से ड्रोन के जरिए आतंक का सामान भेजने की नापाक कोशिश की है, हालांकि पाकिस्तान की हर चाल को भारतीय सेना नाकाम कर रही है। ऐसे में अब तो कुदरत भी पाकिस्तान के खिलाफ हो रहा है। आने वाले दिनों में जो बर्फबारी शुरू होगी वो पाकिस्तान के मंसूबे को अपने साथ जमा देगी।

पीयूष रंजन

 

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