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महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान अपने चरम पर है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों ने प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। बीजेपी की तरफ से जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रचार का जिम्मा संभाल रखा है, वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी आक्रामक चुनावी मोड में आ गए हैं। राहुल गांधी नोटबंदी, जीएसटी, व्यापार और रोजगार को लेकर बीजेपी की सरकार पर प्रहार कर रहे हैं, लेकिन सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि राहुल गांधी के लिए मुद्दे वही है, क्या सोच भी नई है।

दरअसल, ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि, कांग्रेस के भीतर जिस तरह का घमासान देखने को मिल रहा है, इस बिखराव के बीच राहुल गांधी क्या उन मुद्दों पर जनता को प्रभावित कर पाएंगे, जिन्हें 2019 के आम चुनाव में मतदाता पहले ही नकार चुके हैं।

बेशक! राहुल गांधी ढांवाडोल होती देश की अर्थ-व्यवस्था पर वार कर बीजेपी को धराशाई करने का सपना संजो रहे हैं, लेकिन ये वही मुद्दे हैं, जिन पर देश के मतदाताओं ने 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने वोट की मुहर से कांग्रेस के अरमानों पर पानी फेर दिया था।

चौकीदार चोर है, कश्मीर से धारा 370 हटाने का विरोध, एनआरसी और मिशन चंद्रयान पर सवाल उठाकर कांग्रेस की फजीहत पहले ही हो चुकी है. खुद पार्टी के भीतर कई मुद्दों पर नेताओं की अलग-अलग राय बताती है कि पार्टी के भीतर ही मतभेद हैं। ऐसे में राहुल गांधी का इन मुद्दों को फिर से उठाना, क्या वाकई कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित होगा, या कांग्रेस के लिए ये मुद्दे, कहीं फिर तो बैक-फायर नहीं कर जाएंगे।

खैर, जनता जनार्दन है, वो जो भी निर्णय करती है सोच-समझकर करती है। ऐसे में इंतजार 24 अक्टूबर का करना चाहिए, जब चुनाव के नतीजे सामने आएंगे और ये तस्वीर साफ हो जाएगी कि किसके मुद्दों और दावों में कितना दम है।

-अक्षय सिंह गौर

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