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कवि रहीम ने लिखा है …

रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।

पानी गये न ऊबरे, मोती, मानुष, चून॥

अब जमाना बदल गया है। पानी यानि जल के साथ कई और संदर्भ जुड़ गए हैं। यह अब राजनैतिक मुद्दा भी बन गया है। दिल्ली में पानी पर घमासान छिड़ा है। जब से सरकार ने सर्वे के आधार पर साफ पानी को लेकर 21 शहरों की रैंकिंग जारी की है जिसके मुताबिक दिल्ली का पानी सबसे खराब है जबकि मुंबई में सबसे अच्छा। तब से दिल्ली में होने वाली संभावित चुनावों को देखते हुए आरोपों – प्रत्योरोपों का दौर शुरु हो गया है।

दिल्ली के पानी को केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने बेहद खराब करार देते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि कि दिल्‍ली के पानी की क्‍वालिटी को हमने नहीं चेक किया है। यह जांच भारत की मानक संस्‍था ‘भारतीय मानक ब्यूरो’ (Bureau of Indian Standards) ने किया है। उसने बताया कि दिल्‍ली का पानी उनके बनाए मानक के अनुरूप शुद्धता पर सही नहीं पाया जा रहा है।

इस मामले को दिल्‍ली जल बोर्ड के उपाध्‍यक्ष ने भी बयान देकर गरमा दिया। जल बोर्ड के उपाध्यक्ष दिनेश मोहनिया ने कहा कि बीआइएस के अधिकारियों ने पानी की गुणवत्ता जांच के लिए सैंपल नहीं उठाए थे, बल्कि केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी के कार्यकर्ताओं को भेज कर 11 जगहों से उठवाए थे पानी के सैंपल। उन्होंने आरोप लगाया कि पानी के सैंपल उठाने और रिपोर्ट तैयार करने में बीआइएस के मानकों का पालन नहीं हुआ। जल बोर्ड उन 11 जगहों से सैंपल लेकर दोबारा पानी की गुणवत्ता की जांच करा रहा है।

ऐसे में पानी को लेकर चल रही सियासी जंग के बीच आम आदमी पार्टी ने केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान का इस्तीफा मांगा है। पार्टी ने केंद्रीय मंत्री पर पानी की शुद्धता के मुद्दे पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए दिल्ली वालों से माफी मांगने की बात कही है। आप पार्टी के प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कहा कि इसका उद्देश्य हमारी सरकार को बदनाम करना है।

दिल्ली भाजपा ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता कर आम आदमी पार्टी के आरोपों का जवाब दिया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली में लोग दूषित पानी से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि जांच में दिल्ली का पानी फेल हुआ तो मुख्यमंत्री इसे गंभीरता से लेने के बजाय नाराज हो रहे हैं। जीवन से जुड़े इस मुद्दे को वह राजनीतिक मुद्दा बता रहे हैं। मनोज तिवारी ने साल 2014, 2015 और 2019 में पानी को लेकर केजरीवाल के बयान का वीडियो और दूषित पानी की समस्या लेकर लोगों की प्रतिक्रिया दिखाकर मुख्यमंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री समस्या हल करने के बजाय भारतीय मानक ब्यूरो और जनता को झूठा बता रहे हैं।

बहरहाल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मे आज दिल्ली में यह बात मान ली है कि दिल्ली के कुछ इलाके हैं जहां अभी साफ पानी मुहैय्या नहीं कराया जा सका है। पानी की ऐसी समस्या पर केजरीवाल ने पिछली सरकारों पर ठीकरा फोड़ा। उन्होंने  कहा कि यह समस्या 70 साल की समस्या थी, जो 5 साल में ठीक नहीं हो सकती।  हम मानते हैं कि कुछ जगह अभी भी समस्या है लेकिन आने वाले समय में ठीक हो जाएगी। केजरीवाल ने कहा कि जब सरकार बनी थी तो पानी की गुणवत्ता को लेकर कुल 2300 शिकायतें थी जो पिछले 5 साल में महज 125 रह गई हैं. इन 125 शिकायतों के लिए डेडलाइन तय कर दी गई है।

इन सब आरोपों-प्रत्यारोंपों के बीच पिस रही है दिल्ली की जनता, जो अस्वच्छ पानी पीने को मजबूर है। आजादी के 72 सालों के बाद भी यदि देश की राजधानी दिल्ली में आम आदमी को पीने के लिए साफ पानी के लिए मशक्कत करनी पड़े तो यह देश का दुर्भाग्य ही माना जाएगा।

-मनीष राज

 

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