Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

अयोध्या भूमि विवाद या कहें बाबरी मस्जिद विवाद। समझ नहीं आता, सालों से राजनीतिक पार्टियां इसी मुद्दे पर अपनी सियासत भूना रही हैं। चुनाव आने के बाद यह विवाद सूरज की तरह उग जाता है और चुनाव खत्म होने के बाद ढल जाता है। अब जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले को खत्म करने में लगी है तो मध्यस्थता की फूलजड़ी फिर जलाई जा रही है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मध्यसथ्ता के लिए 1 महीने का समय दिया था। तब ये धर्म के पक्षकार भर पेट दाल-भात खा कर सो रहे थे।

फिलहाल, कोर्ट में सुनवाई जारी है। मुस्लिम वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन का कहना है कि वहां मुर्ति रखी गई थी। अरे भाई साहब अगर मुर्ति रखने से राम मंदिर बन जाता तो मक्का मदीना में भी मुर्ति रख दिया जाए।

वैसे राजीव धवन सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं। कानून का ज्ञान ज्यादा होगा, लेकिन ये बताएं अगर मुर्ति रखी जा सकती है तो मंदिर तोड़कर मस्जिद भी बनाई जा सकती है।

जो भी हो सुप्रीम कोर्ट ने अल्टीमेटम जारी कर कह दिया है कि 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी हो। अब देखना है कि 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी होती है या नहीं। वैसे एक बात ये भी है कि देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। वो भी सोच रहे हैं की जाते-जाते ये मुद्दा सुलझा दिया जाए।

वैसे इस मामले में जो भी फैसला कोर्ट सुनाएगा सबको मंजूर ही होगा। नहीं होगा तो मना भी करके कोई क्या कर सकता है। जैसे जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा तो कोई क्या कर पाया? तीन तलाक भी हटा तो कोई कुछ नहीं कर पाया। लोगों को हवा तक नहीं लगी।

ये मुद्दा अगर हल हो गया और हिंदू पक्ष में आया तो बीजेपी की उम्र जरूर बढ़ जाएगी।

अब जो भी हो, मामला सुप्रीम कोर्ट में है। लोग फैसले के इंतजार में है कि राम लला कब विराजेंगे।

-अश्वनी श्रीवास्तव 

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.