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देश में लागू हुआ नया मोटर व्हीकल एक्ट, नियम-कानून की धज्जियां उड़ाने वाले लोगों पर किसी वज्रपात की तरह टूटा है। लोगों को समझ नहीं आ रहा कि दोष बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को दें या ठीकरा सरकार के सिर फोडें।

दरअसल, 1 सितंबर 2019 वो तारीख है, जब देश में नया मोटर-व्हीकल एक्ट लागू कर दिया गया। इस कानून का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना ऐसा, कि अच्छे-अच्छे थूक गुटकने पर मजबूर हो जाएं। सरकार का निर्देश साफ है कि आम हो या खास, नियमों का पालन जरूरी है क्योंकि अब लंबरदारी के दिन लद गए।

सरकार की इस सख्ती के बाद लोगों में इस कानून को लेकर डर तो है, साथ में भरोसा भी कि, ‘नया-नया मुल्ला…आखिर कब तक प्याज मांगेगा’। खैर! ये तो भावना रही उन लोगों की जो अपनी सहूलियत के हिसाब से ख्याली पुलाव बनाने में ज्यादा देर नहीं करते। लेकिन अब लगता है कि लोगों का सब्र टूटने लगा है।

यही वजह है कि भारी भरकम जुर्माने से त्रस्त ट्रांसपोर्टर्स ने दिल्ली NCR में हड़ताल कर दी है। इस हड़ताल की वजह से आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशिनियों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल की वजह से कई जगहों पर स्कूलों को भी बंद करना पड़ा, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है। इन ट्रांसपोर्टर्स की प्रमुख मांग है कि भारी भरकम जुर्माने की रकम को कम किया जाए।

उधर, इस कानून को अमल में लाने का जितना उत्साह हमारे पुलिस के ‘रणबांकुरों’ में देखने को मिल रहा है, उतना उत्साह तो शायद हमारी राज्य सरकारों में भी नहीं है। चौक-चौराहो से लेकर गली-नुक्कड़ तक ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की मुस्तैदी ऐसी जिन्हें देख लंबा-लंबा जाम भी शरमा जाए। ऐसे में उन लोगों को पीड़ा सबसे ज्यादा हो रही है, जो नियम कायदों का पालन कर इस उम्मीद के साथ अपने वाहन को सड़क पर उतारते हैं कि वो अपने गंतव्य तक, बगैर किसी अवरोध के पहुंच पाएंगे।

लेकिन अफसोस, नियम का पालन कराने से ज्यादा चालान के नाम पर लोगों की जेब काटने पर फोकस, बेतरतीब ट्रैफिक को जन्म दे रहा है। वाहन चेकिंग के नाम पर कई जगह पर तो पुलिसकर्मी अचानक ऐसे सामने आ जाते हैं कि लोगों को वर्दी के भीतर यमराज के दर्शन हो जाते हैं। इसका उदाहरण है गाजियाबाद के साथ कुछ इलाकों में वाहन चेकिंग के दौरान लोगों की हृदयगति का रुक जाना। शायद यही वजह है कि कई राज्यों ने इस कानून को इसलिए लागू करने से इंकार कर दिया क्योंकि उन्हें लगता है कि जुर्माने की रकम जेब को काटने वाली है। खुद बीजेपी शासित कुछ राज्यों ने या तो नया नियम अब तक लागू नहीं किया या फिर इसमें संशोधन करने का फैसला किया है।

केन्द्र सरकार ने नया कानून लागू कर दिया है। मोदी सरकार के मंत्रियों के बयानों से साफ है कि सरकार इस मामले में कोई रियायत बरतने के मूड में नहीं है। ऐसे में लोगों की जुबान पर बरबस, दबंग फिल्म से मिलता-जुलता डायलॉग आ ही जाता है। “कानून से डर नहीं लगता साहब ‘चालान’ से लगता है”।

– अक्षय गौर

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