देश में चीन से आय़ातित खिलौनों की भरमार हो गई है। दुनिया भर में चायनीज सामानों की बायकाट की बात की जा रही है। भारत में इसी सिलसिले में खिलौना निर्माण क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने की बात आगे बढ़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शनिवार को सुबह 11 बजे इंडिया टॉय फेयर 2021 का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान खिलौना निर्माताओं से कम प्लास्टिक, अधिक रिसाइकिल करने योग्य सामग्री का उपयोग करने को कहा है। प्रधान मंत्री कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ‘खिलौने एक बच्चे के दिमाग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और बच्चों में साइकोमोटर और संज्ञानात्मक कौशल को बेहतर बनाने में भी मदद करते हैं। अगस्त 2020 में अपने मन की बात संबोधन में, प्रधान मंत्री ने कहा था कि खिलौने न केवल गतिविधि में वृद्धि करते हैं, बल्कि आकांक्षाओं की उड़ान के लिए भी जरूरी हैं।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश ने खिलौना उद्योग को 24 प्रमुख क्षेत्रों में दर्जा दिया है। राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना भी तैयार किया गया है। इसमें 15 मंत्रालयों और विभागों को शामिल किया गया है ताकि ये उद्योग प्रतियोगी बने, देश खिलौनों में आत्मनिर्भर बनें और भारत के खिलौने दुनिया में जाएं। एक बच्चे के समग्र विकास में खिलौनों के महत्व को ध्यान में रखते हुए, प्रधान मंत्री ने पहले भी भारत में खिलौना निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।…और अब भारत खिलौना मेला 2021 प्रधानमंत्री के इसी दृष्टिकोण के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है। पीएम ने कहा कि आज खिलौना मेला के इस अवसर पर हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम इस ऊर्जा को आधुनिक अवतार दें, इन संभावनाओं को साकार करें। अगर आज Made in India की डिमांड है तो आज Hand Made in India की डिमांड भी उतनी ही बढ़ रही है।

इंडिया टॉय फेयर 2021 में प्रधानमंत्री ने बताया कि आज जो शतरंज दुनिया में इतना लोकप्रिय है, वो पहले ‘चतुरंग या चादुरंगा’ के रूप में भारत में खेला जाता था। आधुनिक लूडो तब पच्चीसी’ के रुप में खेला जाता था। हमारे धर्मग्रन्थों में भी बाल राम के लिए अलग-अलग कितने ही खिलौनों का वर्णन मिलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना था कि सिंधुघाटी सभ्यता, मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा के दौर के खिलौनों पर पूरी दुनिया ने रिसर्च की है।

प्राचीन काल में दुनिया के यात्री जब भारत आते थे, तो भारत में खेलों को सीखते भी थे और अपने साथ लेकर भी जाते थे। यह साबित करता है कि हमारे खिलौने पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण को दर्शाते हैं जो भारतीय जीवन शैली का एक हिस्सा रहा है। अधिकांश भारतीय खिलौने प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से निर्मित हैं। उनमें इस्तेमाल किए जाने वाले रंग प्राकृतिक और सुरक्षित हैं।

इस अवसर पर कारीगरों व अन्य लोगों से बातचीत करने के बाद पीएम मोदी ने कहा, ‘आप सभी से बात करके ये पता चलता है कि हमारे देश के खिलौना उद्योग में कितनी बड़ी ताकत छिपी हुई है। इस ताकत को बढ़ाना, इसकी पहचान बढ़ाना,आत्मनिर्भर भारत अभियान का बहुत बड़ा हिस्सा है।’

यह मेला 27 फरवरी से 2 मार्च, 2021 तक आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य खरीदारों, विक्रेताओं, छात्रों, शिक्षकों, डिजाइनरों आदि सहित सभी हितधारकों को एक साथ लाने के लिए एक आभासी मंच तैयार करने का है। इस मंच के माध्यम से, सरकार और उद्योग इस बात पर चर्चा करने के लिए एक साथ आएंगे कि कैसे भारत को क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और निर्यात को बढ़ावा देने के माध्यम से खिलौनों के विनिर्माण और सोर्सिंग के लिए अगला वैश्विक केंद्र बनाया जा सकता है। 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1000 से अधिक प्रदर्शक अपने उत्पादों को ई-कॉमर्स सक्षम आभासी प्रदर्शनी में प्रदर्शित करेंगे। इसमें पारंपरिक भारतीय खिलौनों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक खिलौने, आलीशान खिलौने, पहेलियां और खेल सहित आधुनिक खिलौने प्रदर्शित किए जाएंगे।यह मेला कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के साथ कई वेबिनार और पैनल डिस्कशन की मेजबानी भी करेगा, जिसमें टॉय डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग की सिद्ध क्षमताएं होंगी। बच्चों के लिए, यह एक अच्छा अवसर है, जिसमें पारंपरिक खिलौना बनाने पर शिल्प प्रदर्शन और खिलौना संग्रहालयों और कारखानों में आभासी तौर से वे शामिल हो सकेंगे।

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