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राम की नगरी अयोध्या नया रूप लेने जा रही है। इस नगरी का नक्शा ही बदलने वाला है। इसे धनुष के साचें में ढाला जाएगा। धनुषकारी यानी करमुखा पद्धि से सजाया जाएगा। कई विशेषज्ञ इंजीनियरों व वास्तुविदों ने मिलकर इसे तैयार किया है। इस पहल से अयोध्या तो सुदंर लगेगा ही साथ में राम मंदिर की छठा में भी चार चांद लग जाएंगे। सड़कों का नजारा एसा होगी कि मानो सूर्योदय मंदिर से ही हो रहा। मंदिर सूर्य की किरणों की तरह चमक उठेगा।

इंजीनियरों व वास्तुविदों ने किया परीक्षण

इसमें स्मार्ट सिटी व वैदिकता का समावेश भी किया गया है। ले आउट बनाने से पहले आवास विकास के विशेषज्ञ इंजीनियरों व वास्तुविदों ने प्राचीन वैदिक नगरों के निर्माण व विकास में प्रयुक्त आठ विधाओं का परीक्षण किया। आवास विकास ने इसे पौराणिक, सांस्कृतिक आस्था के केंद्र के साथ भविष्य में बढ़ने वाली जनसंख्या को ध्यान में रखकर तैयार किया है। नई अयोध्या को विश्व के सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहरों के केंद्र के रूप में भी स्थापित करने की योजना है।

देश विदेश के कई धार्मिक शहरों का अध्ययन किया। उनकी अच्छाईं व खामियों पर चर्चा की। आवास विकास परिषद के इंजीनियरों, वास्तुविदों ने इसके लिए कुछ बड़े आर्किटेक्टों की मदद ली है। सीएम सहित कई धर्म  विशेषज्ञों से भी बात की। फिर इसमें आधुनिकता का समावेश किया। इसके बाद डिजाइन तैयार हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष पिछले हफ्ते इसका प्रेजेंटेशन भी कर दिया गया।

नई अयोध्या चार किलोमीटर दूर 

राम मंदिर से नई अयोध्या की दूरी चार किलोमीटर है लेकिन इस पद्धति की डिजाइनिंग से राम मंदिर के पास से जो सड़कें निकलेंगी वह ऐसे दिखेंगी जैसे मंदिर से सूर्य की किरणें निकल कर बिखर रही हों। सड़कों के रूप में यह किरणें लंबी दूरी तक दिखाई देंगी। खास बात यह है कि यह भगवान राम की प्रतिमा के नजदीक से लेकर नई अयोध्या के आखिरी छोर तक सड़कें सूर्य की किरणों की भांति ही नज़र आएंगी। मंथन के बाद धनुषाकार यानी करमुखा पद्धति से लेआउट बनाया गया।

अयोध्या में नई कॉलोनी का लेआउट तैयार हो गया है। इसे धनुषाकार यानी करमुखा पद्धति से तैयार किया गया है। इसके बनने के बाद ऐसा लगेगा जैसे मंदिर से सूर्य की किरणें बिखर रही हो

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