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आमतौर पर शत्रुध्न सिन्हा यानि बिहारी बाबू फिल्मों में सबको खामोश बोलते रहते हैं। राजनैतिक कॉरियर में वो भी इसी दबंगई के साथ बातें करने के आदी रहे हैं। ऐसे में वो जब तब अपनी ही पार्टी और उसके नेताओं के फैसले पर सवाल खड़े करते रहते हैं। लेकिन कहते हैं ना हर शेर को सवा शेर मिल ही जाता है। भाजपा से असंतुष्‍ट चल रहे पार्टी के वरिष्‍ठ नेता एवं पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्‍न सिन्‍हा के ऐसे बयानों पर मोदी सरकार के एक मंत्री की तरफ से शनिवार को कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है।

पश्चिम बंगाल से पहली ही बार सांसद बने केंद्रीय राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो ने शत्रुघ्‍न सिन्‍हा के बगावती बयानों को लेकर कहा कि अगर उन्‍हें इतनी नफरत है तो वे रोज संसद में आकर क्‍यों बैठते हैं। साथ ही उन्‍होंने अपने वरिष्‍ठ नेता को यह नसीहत भी दे डाली कि वे ‘तीन तलाक’ लेकर खुद बीजेपी को छोड़ दें। गौर करने वाली बात है कि बीजेपी के हाल में राजस्थान में हुए उपचुनावों के हारने पर बिहारी बाबू ने मौका ना चूकते हुए आनन फानन में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को एक चुभता हुआ ट्वीट दे मारा था।

बाबुल सुप्रियो ने न्‍यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा, ‘शत्रुघ्‍न सिन्‍हा जी को बोलता हूं आपको इतनी नफरत है तो क्‍यों रोज आकर संसद में बैठते हैं? क्‍यों ऐसे हालात पैदा करते हैं कि दूसरों को बोलना पड़े ‘खामोश’ । तकाजा तो यह होता है कि  ड्रेसिंग रूम की बात वहीं रहनी चाहिए। आप तीन तलाक दीजिए और खुद छोड़ दीजिए बीजेपी’।

हालांकि एक मौके पर जब शत्रुघ्न सिन्हा से इन अटकलों को लेकर सवाल पूछा गया कि पार्टी नेतृत्व सरकार के खिलाफ सार्वजनिक हमलों को लेकर उनका टिकट काट सकती है, उन्होंने कहा कि पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान भी ऐसा ही दावा किया गया था और उनका नाम उन लोगों में शामिल था जिनका नाम सबसे आखिर में घोषित किया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘यह मुद्दा नहीं कि वे (भाजपा) मुझे टिकट देंगे या नहीं। इस पर भी विचार किया जायेगा कि वे मुझे टिकट क्यों नहीं देंगे। मेरे पास सबसे ज्यादा वोट शेयर का मार्जिन है…दूसरा, यह कि मैं इसे लूंगा या नहीं, या कहां से लड़ूंगा या नहीं लड़ूंगा…सिर्फ समय बतायेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे कोई चिंता नहीं। मैं निर्भय हूं।’’

लेकिन बाबुल सुप्रियो का उनसे यह सवाल पूछना भी जायज है कि आखिर जब उनको पार्टी की तय नीतियों से इतनी ही चिढ़ है तो क्यों नहीं वे भारतीय जनता पार्टी को तलाक दे देते। कोई दूसरा उन्हें दबंगई के साथ खामोश बोले इससे अच्छा है कि वे ससम्मान पार्टी की राहों से अलग राह अपना लें वैसे यह तय बिहारी बाबू को ही करना है।

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