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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को लेटर लिखकर ऐसा बम फोड़ा की पूरे प्रदेश में राजनीति गरमा गई। सत्ता का सिंहासन दूर होने और गद्दी की छटपटाहट में मरांडी ने जेवीएम के 6 विधायकों की हॉर्स ट्रडिंग का आरोप बीजेपी पर मढ़ दिया। मरांडी ने रघुवर दास के साथ-साथ तत्काल प्रदेश बीजेपी प्रभारी त्रिवेंद्र रावत को भी इस हॉर्स ट्रेडिंग का आरोपी बना दिया। मरांडी यहीं नहीं रुके उन्होंने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग भी कर दी थी जिसके बाद अब बीजेपी ने उनके आरोपों पर पलटवार किया है।

बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया था कि सभी 6 विधायकों को दो-दो करोड़ रूपये नगद और मंत्री पद का लालच देकर ही बीजेपी में शामिल कराया गया था। उनके आरोपों पर बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कोडरमा सांसद रवींद्र राय ने कहा है कि जेवीएम के नेता खास कर प्रदीप यादव कह रहे हैं कि मेरे हस्ताक्षर के नमूने उनके पास हैं। प्रदीप यादव ने ये भी कहा है कि हम लोग हस्ताक्षर को भलीभांति पहचानते है़ं प्रदीप यादव की बात से स्पष्ट है कि पत्र की लिखावट से लेकर हस्ताक्षर तक के सारे षड्यंत्र में जेवीएम के वरिष्ठ नेता शामिल हैं। हस्ताक्षर के नमूने रख कर उन्होंने नकल का प्रयास किया है। उसका दुरुपयोग कर पत्र बनाये गये हैं। जेवीएम को स्पष्ट करना चाहिए कि पत्र में लिखावट किसकी है।

वहीं दूसरी ओर मंत्री अमर कुमार बाउरी ने पत्र को फर्जी करार देते हुए बाबूलाल मरांडी के राज्य की राजनीति में हासिये में जाने के कारण हताश में उठाया जा रहा कदम बताया। अमर कुमार बाउरी ने कहा कि जेवीएम विधायक दल की पहली बैठक में बाबूलाल मरांडी ने ही बीजेपी में विलय की बात कही थी लेकिन उन्होंने होली तक रुकने की बात कही थी लेकिन राज्य में स्थिर सरकार देने के लिए हम सभी विधायक बीजेपी में गए थे। मंत्री ने कहा कि इस पत्र की चर्चा पिछले आठ महीने से चल रही थी और इसकी जानकारी मुझे भी थी। उन्होंने कहा कि अगर बाबूलाल माफी नही मांगते है तो उनपर मामला दर्ज कर कार्रवाई जाएगी। आने वाले चुनाव में जनता बाबूलाल को जबाब देगी। आज की राजनीति में बाबूलाल मरांडी की कोई जगह नही है।

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