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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच कर रहे एजेंसी के अधिकारी मनीष कुमार सिन्हा ने सोमवार को आरोप लगाया कि एक केंद्रीय मंत्री ने एक व्यवसायी के मामले में हस्तक्षेप करने के लिए रिश्वत के रूप में ‘कुछ करोड़’ रुपये लिये। सिन्हा ने कहा कि केंद्रीय मंत्री एजेंसी के रडार पर हैं और इसलिए उच्चतम न्यायालय को अविलंब इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए। लेकिन उन्होंने जब मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया तो गोगोई ने इसे खारिज कर दिया।

सीबीआई के तबादला किये गये अधिकारी कुमार ने नागपुर किये गये अपने तबादले के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अदालत को सूचित किया है कि उनके पास जो दस्तावेज हैं, वे अदालत को ‘स्तब्ध’ कर देंगे।

इस पर न्यायालय ने कहा, ” कुछ भी हमें स्तब्ध नहीं कर सकता और साथ ही सिन्हा की तत्काल सुनवाई करने से साफ इन्कार कर दिया।”

सिन्हा ने कहा कि उनका तबादला इसलिए किया गया ताकि जांच का काम प्रभावित हो तथा इस प्रकिया से राकेश अस्थाना के विरुद्ध जारी जांच पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। सिन्हा इससे पहले अस्थाना पर हैदराबाद स्थित व्यापारी सतीश साना से कथित रूप से रिश्वत लेने के आरोपों की जांच कर रहे थे। साना धन शोधन मामले के आरोपी मीट निर्यातक मोइन कुरैशी, वह कई मामलों में मोईन का सह आरोपी है। इस बीच, सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने शीर्ष अदालत के आदेश को लागू करते हुए अपना जवाब दाखिल किया। न्यायालय ने गत सप्ताह पेश की गयी सीवीसी की रिपोर्ट पर जवाब देने को कहा था।

केंद्रीय मंत्री हरिभाई का आरोपों से इंकार

केन्द्रीय मंत्री हरिभाई ने सोमवार को सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी एम के सिन्हा द्वारा उनके खिलाफ लगाये गये आरोपों को ‘‘आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण’’ बताया। चौधरी ने कहा कि यदि ये आरोप साबित हो जाते हैं तो वह राजनीति छोड़ देंगे। कांग्रेस ने आरोपों को गंभीर बताते हुए इसकी स्‍वतंत्र जांच की मांग की है।

           -साभार, ईएनसी टाईम्स

 

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