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चीन लंबे समय से दक्षिणी चीनी समुद्र पर अपनी सक्रियता बनाए हुए है। इस पर अंतरराष्ट्रीय अदालत ने चीन के खिलाफ फैसला दे चुका है। वहीं चीन ने समुद्र के नीचे पहला प्लेटफॉर्म बनाने जा रहा है। दक्षिणी चीनी समुद्र प्राकृतिक संसाधनों के लिए काफी संपन्न माना जाता है। इस क्षेत्र में दावेदारी को लेकर चीन का मलेशिया, फिलिपीन्स, वियतनाम समेत कुछ दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों से विवाद काफी समय से चल रहा है। वहीं चीन अब अंडर-वॉटर प्लेटफॉर्म का निर्माण कर रहा है। जिसका मकसद समुद्र के नीचे की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखना है। जैसे-जैसे दक्षिणी चीनी समुद्र को लेकर चीन पर दबाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे वह और अधिक आक्रामक होता जा रहा है।

South Sea

चाइनीज अकैडमी ऑफ साइंसेज (CAS) के एक वैज्ञानिक वांग पिनजियान ने बताया, “शंघाई के तोंगजी यूनिवर्सिटी और इंस्टिट्यूट ऑफ अकूस्टिक्स की मदद से दक्षिणी चीन सागर और पूर्वी चीन सागर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दीर्घकालिक निरीक्षण प्लेटफॉम का निर्माण कराया जाएगा।” इंस्टिट्यूट ऑफ अकूस्टिक्स ने प्लेटफॉर्म से जुड़ी अन्य जानकारी देने से साफ मना कर दिया। पिनजियान ने शंघाई में बताया कि इस प्रोजैक्ट की संवेदनशीलता को देखते हुए एहतियात बरते जा रहें हैं।

दुनिया के ज्यादातर समुद्रीय यातायात का एक तिहाई हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यहां पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बहुत बड़ा भंडार है। चीन इसके पूरे हिस्से पर अपनी दावेदारी करता है। खबरों के मुताबिक, इस अंडर-वॉटर प्लेटफॉर्म की मदद से चीन समुद्री गतिविधियों पर तो नजर रखेगा ही, साथ ही इसे कई अन्य चीजों में भी इस्तेमाल करेगा।

ख़बरों के मुताबिक इसे बनाने के लिए चीनी वैज्ञानिकों के नेतृत्व में एक ड्रिलिंग प्रोजैक्ट के लिए 7 फरवरी को अमेरिका, फ्रांस, इटली और जापान सहित 13 अन्य देशों के 33 वैज्ञानिक शामिल हैं। वैज्ञानिकों ने पहले ड्रिल का काम पूरा कर लिया है। जिसमें समुद्रमें लगभग 3,770 मीटर नीचे तक ड्रिल किया जा चुका है। वहीं दूसरे ड्रिल का काम भी शुरू हो चुका है।

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