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Year Ender 2021: CJI N. V. Ramana की वो 5 बड़ी टिप्पणी जिसने देश के लोगों में न्‍याय के प्रति विश्‍वास भर दिया

Year Ender 2021: नए साल का स्वागत करने के लिए सभी लोग तैयार हैं। कुछ ही दिन में साल 2021 को अलविदा कहते हुए दुनिया नए साल में प्रवेश करेगी। इस बीच साल की बड़ी घटनाओं, बड़े फैसलों के बारे में चर्चा शुरू हो गई है। ऐसे में भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना (CJI N. V. Ramana) द्वारा 2021 में लिए गए फैसलों पर बात करेंगे। सीजेआई द्वारा की गईं टिप्पणियां लोकतंत्र की आजादी, न्यायालय की समस्याएं, हिरासत में मौत, कानून बनाते वक्त संसद में बहस की कमी जैसे कई समसामयिक और गंभीर मसलों पर रही।

Year Ender 2021: CJI N. V. Ramana की 5 टिप्पणी

CJI N. V. Ramana
CJI N. V. Ramana

देश में न्‍याय की उम्‍मीद एक बड़ी महंगी प्रक्रिया है। न्‍याय पाने के संघर्ष में जीवन बीत जाती है, उम्‍मीदें टूट जाती है लेकिन न्‍याय सही समय पर नहीं मिल पाता। देश में प्रदूषण का मामला हो या कोरोना के दौरान मुफ्त टीकाकरण की बात हो, देश के सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने यह साबित कर दिया कि लोगों के लिए यह अदालत हरदम उनके साथ है। यहां हम जिक्र कर रहे हैं CJI N. V. Ramana के 5 बड़े फैसले की जिसे सीजेआई ने वर्ष 2021 में दिया।

प्रदूषण पर कोर्ट ने सरकार को दी नसीहत

दिल्ली-एनसीआर और इससे सटे राज्यों में जब जानलेवा प्रदूषण लोगों का गला घोंट रहा था तब CJI N. V. Ramana ने स्थिति संभालने के लिए कमान अपने हाथों में ली थी। प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान 3 सदस्यीय बेंच ने उनकी ही अध्यक्षता में मामले की सुनवाई की, केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिल कर काम करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान बेंच ने फटकार भी लगाई साथ ही नसीहत भी दी।

अहम बात ये रही कि शायद पहली बार पीठ ने प्रदूषण के किसान विरोधी नैरेटिव को खारिज करते हुए शहर से होने वाले प्रदूषण के प्रभावी नियंत्रण की बात कही थी। CJI एनवी रमन्ना ने कहा था कि सरकार अगर पराली जलाने को लेकर किसानों से बात करना चाहती है तो बेशक करे, लेकिन हम किसानों पर कोई जुर्माना नहीं लगाना चाहते है। CJI ने खरी खरी सुनाते हुए कहा था कि ये अफसोस की बात है कि प्रशासन चाहता है कि सब कुछ कोर्ट करे।

पेगासस मामले न्यायिक जांच कमेटी का गठन

Pegasus
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हाल ही के दिनों में न्याय व्यवस्था के प्रति घटती आस्था के परिपेक्ष में CJI N. V. Ramana का पेगासस मामले में तमाम दबाव के बावजूद न्यायिक जांच कमेटी गठित करना एक अहम फैसला माना गया था। ये बहुमत की सरकारों को उनके संवैधानिक दायित्तव निभाने पर की गई सख्ती रही।

सुप्रीम कोर्ट ने कथित पेगासस जासूसी मामले में स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि पेगासस जासूसी केस की जांच तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए यह भी कहा था कि लोगों की जासूसी किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं की जा सकती।

नियुक्ति के लिए TRIBUNALS का गठन

न्यायपालिका का एक अपेक्षित हिस्सा है न्यायधिकरण या TRIBUNALS, वर्षों से देश के ट्रिब्यूनलों में जजों की नियुक्तियां नहीं हुई थी। कई ट्रिब्यूनलों में तो अध्यक्ष तक नहीं थे। CJI N. V. Ramana ने इस मसले पर सरकार को आड़े हाथ लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल में रिक्तियों को भरने से संबंधित मामले में केंद्र सरकार की सख्त आलोचना की थी।

न्यायपालिका में महिलाओं के आरक्षण की पैरवी

चीफ जस्टिस एन वी रमन्ना ने न्यायपालिका में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण की पैरवी की थी। उन्होंने कहा था कि आरक्षण महिलाओं का हक है, जो उन्हें मिलना चाहिए। उन्होंने न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों में महिलाओं की कम संख्या का भी हवाला दिया और कहा कि महिलाएं न्यायपालिका और लॉ कॉलेजों में भी आरक्षण की हकदार हैं। बहुत ही आकर्षक और काव्यात्मक लहजे में चीफ जस्टिस रमना ने कहा था दुनिया की महिलाओं एक हो जाओ, तुम्हारे पास खोने के लिए जंजीरों के अलावा कुछ नहीं।

न्यायाधीशों और अदालतों की सुरक्षा के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान

N.V Ramanna
CJI N. V. Ramana

कोर्ट परिसर में जिस तरह से जजों को निशाना बनाया जा रहा है वह चिंताजनक है। जजों की सुरक्षा का मामला अब काफी अहम हो गया है। धनबान, रोहिणी और अब मधुबनी में जजों पर हमलों की खबरें आती ही रहती हैं। CJI N. V. Ramana ने इसे काफी गंभीरता से लिया है। CJI ने झारखंड के अतिरिक्त जिला जज उत्तम आनंद की संदिग्ध मौत मामले में न्यायाधीशों और अदालतों की सुरक्षा के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया था।

CJI N. V. Ramana ने अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से कहा कि देश के जजों पर न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी हमला किया जा रहा है। व्हाट्सएप पर धमकी देकर और डराने वाले संदेश भेजकर सोशल मीडिया पर उस पोस्ट को भी प्रसारित किया जा रहा है। जब रोहिणी कोर्ट में हमला हुआ तब भी कोर्ट्स की सुरक्षा पर CJI ने विस्तार में दिशा निर्देश दिया था। उन्होंने यहां तक कह डाला था कि सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में सही तरीके से काम नहीं कर रही है। सरकार को उन्होंने सुरक्षा कड़ी करने के सख्त निर्देश दिए थे।

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