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राजस्थान में डॉक्टरों की हड़ताल पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार(25 नवंबर) को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कह दिया कि वह हड़ताली डॉक्टरों के खिलाफ जो कानूनी कार्रवाई करना चाहती है वह करने को स्वतंत्र है। कोर्ट ने सरकार से कहा कि आप डॉक्टरों को तुरंत गिरफ्तार कर सकते हैं। सोमवार को छुट्टी होने के बावजूद कोर्ट खोला गया और मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग और डीसी सोमनी की खण्डपीठ ने इस मामले की विशेष सुनवाई की।

राजस्थान में डॉक्टर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 10 दिन से हड़ताल पर हैं। इससे पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं चरमारा गई हैं. इतना ही नहीं इनके समर्थन में सोमवार को निजी अस्पतालों में भी OPD सेवाएं बंद रखीं।

इसी मामले में पिछले हफ्ते कोर्ट ने डॉक्टरों को फौरन काम पर लौटने के लिए कहा था और सरकार को निर्देश दिया था कि जो डॉक्टर काम पर लौट आएं उनके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई न की जाए। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद डॉक्टर काम पर वापस नहीं लौटे इसके बाद एक वकील अभिनव शर्मा और सरकार की तरफ से विशेष सुनवाई के लिए कोर्ट से प्रार्थना की गई थी। इसी पर सुनवाई करते हुई हाकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश मुताबिक डॉक्टर हड़ताल पर नहीं जा सकते हैं। राजस्थान सरकार ने आवश्यक सेवा अधिनियम (ESMA) भी लागू कर रखा है।

सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने डॉक्टर संघ के अध्यक्ष के वकील से पूछा कि वह काम पर लौटना चाहते हैं या फिर नहीं, इसके जवाब में कोर्ट को कहा गया कि डॉक्टरों का तबादला किया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह निजी मामला है और इसके लिए आप आम जनता को परेशान नहीं कर सकते।

राजस्थान में डॉक्टरों की हड़ताल के चलते हालात खराब हैं पूरे प्रदेश में इस हड़ताल के कारण इलाज के अभाव में अब तक 40 से ज़्यदा मरीज़ों की जान चली गई है। रेजिडेंट डॉक्टरों और इंटर्न डॉक्टरों के भी इस हड़ताल में शामिल होने से हालात बदतर हो गए हैं। राज्य सरकार स्थिति से निपटने के लिए सेना, BSF और रेलवे के डॉक्टरों की मदद ले रही है।

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