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बामुलाहिजा, होशियार ! बात राजा की नहीं उससे भी कीमती जान की हो रही है। कुछ भी जानने के पहले यूपी के इस जिला अस्पताल का सच जान लीजिए। ये है हरदोई जिला अस्पताल का आकस्मिक वार्ड यानि, ईमरजेंसी वार्ड। जहां आपात स्थिति में मरीजों की जान बचाने के दावे किये जाते हैं। लेकिन ये दावे कभी सच्चे वादे साबित होते होंगे ये आप इन तस्वीरों से खुद समझिए।

यहां मरीजों के साथ कुत्तों का भी बे-रोक-टोक आना-जाना है। कुत्ते मानो अस्पताल प्रशासन को मुंह चिढ़ा रहे हैं। बता रहे हैं कि, डॉक्टर साहब, अधीक्षक महोदय, प्रभारी सीएमओ एस पी गौतम और सीएमओ यहां आएं न आएं लेकिन उनकी वफादारी पर आप सवाल हरगिज नहीं उठा सकते। सरकार किसी की रहे, यूपी के सरकारी अस्पतालों का यही हाल रहता है। वैसे सफाई जरूर दिखी। शायद यही इन कुत्तों को गंदे सड़कों से अस्पताल में खींच लाई।

भले ही मरीजों की जान पर बन आए। उन्हें इन आवारा कुत्तों के काटने से गहरे जख्म हो जाएं। लोगों को रैबीज जैसी जानलेवा बीमारी आ घेरे लेकिन हरदोई जिला अस्पताल प्रशासन को इससे कोई मतलब नहीं दिखता। ऐसा होता तो इंसान के अस्पताल में इन कुत्तों का डेरा नहीं होता। मरीजों के बेड के नीचे और लॉबी में उनका राज नहीं होता । सीतापुर और मुरादाबाद में आदमखोर कुत्तों के आतंक से भी हरदोई जिला अस्पताल प्रशासन कोई सबक लेने को तैयार नहीं दिखता।

ईश्वर न करे कि, कोई मरीज इनका शिकार हो। लेकिन, सवाल तो यही है कि, इन आवारा कुत्तों को न तो एंटी रैबिज के इंजेक्शन लगे हैं और न ही ये पालतू हैं। ऐसे में आपको स्वयं अपनी सुरक्षा करनी पड़ेगी। हरदोई जिला अस्पताल में एंटी रैबिज वैक्सान है या नहीं ये तो पता नहीं..लेकिन, एक बात मालूम है जिसे जानना आपके लिए बहुत जरूरी है। इन आवारागर्द कुत्तों से सावधान रहिये। क्योंकि, सावधानी ही बचाव है। बाबू। ! जाहिर है कि, साहेब।

नए किरदार आते जा रहे हैं

मगर नाटक पुराना ही चल रहा है

                                                                                                                        एपीएन ब्यूरो

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