वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने आज पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) घटक दलों के कई शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के तौर पर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कमलनाथ को दोपहर करीब ढाई बजे राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ दिलाई। इस दौरान संप्रग घटक दलों के वरिष्ठ नेता एच डी देवेगौड़ा, फारुख अब्दुल्ला, शरद पवार, शरद यादव, चंद्रबाबू नायडू समेत एम के स्टालिन और तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे।

भव्य समारोह में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बाबूलाल गौर और कैलाश जोशी भी मंच पर उपस्थित रहे। राजस्थान के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और पार्टी की उत्तरप्रदेश इकाई के अध्यक्ष राज बब्बर भी इस दौरान मौजूद रहे।

प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पार्टी की चुनाव अभियान समिति प्रमुख ज्योतिरादित्य सिंधिया, वरिष्ठ नेता अजय सिंह समेत लाखों की संख्या में कार्यकर्ता भी समारोह में शामिल हुए। कमलनाथ ने फिलहाल अकेले शपथ ग्रहण की। कुछ दिनों में उनके मंत्रिमंडल का गठन करने की संभावना है।राज्य में 15 साल बाद कांग्रेस ने सरकार में वापसी की है।

सिख दंगों के कारण कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने का विरोध
भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ पर 1984 के सिख दंगों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उन्हें मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाये जाने का विरोध किया है। कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा सिख दंगों के मामले में आज आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है। कांग्रेस को छोड़कर कई अन्य राजनीतक दलों ने इसका स्वागत किया है लेकिन कहा है कि कमलनाथ भी इस मामले में शामिल हैं और कांग्रेस को उन्हें मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहिए।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कमलनाथ का नाम नहीं लेते हुए कहा कि यह विडंबना है कि सज्जन कुमार के बारे में फैसला ऐसे दिन आया है जब सिख समाज एक और कांग्रेसी नेता को इस मामले का दोषी मानता है जबकि कांग्रेस उसे मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला रही है। उल्लेखनीय है कि कमलनाथ ने आज ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की है क्योंकि कमलनाथ का नाम सिख दंगों की जांच करने वाले नानावती आयोग के सामने पेश हलफनामे में सबूतों के साथ दिया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक ऐसे व्यक्ति को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया है जो सिख दंगों में शामिल हैं और गांधी को उन्हें पार्टी से निकालना चाहिए।

आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने कहा है कि कमलनाथ को जब पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया था तो लोगों के विरोध पर उन्हें वापस बुलाया गया था लेकिन अब उन्हें मुख्यमंत्री क्यों बनाया जा रहा है। कांग्रेस लोगों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है। लोगों ने इन दंगों में भीड़ को भड़काते देखा है लेकिन अभी तक उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गयी है। इस बीच राजधानी दिल्ली में सिख समुदाय ने कमलनाथ को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाये जाने के विरोध में धरना प्रदर्शन किया और उनका पुतला भी जलाया।

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