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जीएसटी लागू किए जाने के बाद ही आम जनता द्वारा लगातार इसका विरोध किया जा रहा था। देश में जनता को बार बार टैक्स देने के झंझट से छुटकारा दिलाने की वजह से ही जीएसटी(एक देश एक टैक्स) को लागू किया गया था। लेकिन जनता को सिर्फ और सिर्फ महंगाई बढ़ती नजर आ रही थी। इसलिए काफी विचार विमर्श करने के बाद जीएसटी काउंसिल ने जनता की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 200 से अधिक वस्तुओं की कर दरों में संशोधन कर दिया था। 200 में से 178 से ज्यादा वस्तुएं ऐसी थी, जिन पर 28 फीसद स्लैब के अंतर्गत टैक्स लगता था, उन सभी वस्तुओं पर कर दर कम कर दी गई थी।

लेकिन इसके बाद भी आम जनता को लगातार भ्रमित किया जा रहा था और नई रेट लागू किए जाने के बाद भी पुरानी रेट के मुताबिक सामान बेचा जा रहा था, जिसका हर्जाना जनता को अधिक पैसे देकर भुगतना पड़ रहा था।

इसलिए अब जनता को जीएसटी में किए गए संशोधन से होने वाले फायदों को समझाने के लिए मोदी सरकार ने एक बेहद ही उमदा कदम उठाया है। सरकार ने सभी कंज्यूमर गुड्स कंपनियों और इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स को निर्देशित करते हुए कहा है, ‘कि बाजार में बिकने वाली हर वस्तु पर मौजूदा एमआरपी के साथ पुरानी एमआरपी का भी स्टीकर चिपकाया जाए’। नए प्राइस टैग के साथ बेचे जाने वाले सामानों पर पुरानी कीमत से तुलना भी दिखाई जाए। सरकार जनता को यह समझाना चाहती है, कि जीएसटी में स्लैब बदलने के बाद प्रॉडक्ट्स के रेट्स में कितनी कमी आई हैं।

ऐसा इसलिए भी किया गया है, ताकि जनता खुद जीएसटी स्लैब में किये गए संशोधन के बाद मूल्यों में आई गिरावट का पहले के मूल्यों से तुलना कर सकें। इससे फाएदा ये होगा कि जनता खुद ये सुनिश्चित कर सकेगी, कि जीएसटी में संशोधन करने के बाद जनता को सामान सस्ता मिल रहा हैं या नहीं।

उपभोक्ता को बनाएगा जागरूक-

मोदी सरकार द्वारा लागू किया गया ये नया आदेश जनता को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाएगा। उपभोक्ता दोनों प्राइस टैग के जरिए आसानी से इस बात को समझ सकेंगे कि सरकार हर तरह से जनता के हित के लिए काम कर रही है, साथ ही महंगाई पर लगाम कसने की पूरी कोशिश कर रही है।

मैट्रोलॉजी विभाग ने बताया कि किसी भी वस्तु पर दोनों कीमतों के प्राइस टैग लगाए जाने का आदेश 31 दिसंबर तक देश में लागू रहेगा। ग्रांट थॉर्टन इंडिया के पार्टनर धनराज भगत ने बताया, “यह फैसला उपभोक्ता को उनके हक की जानकारी देगा। साथ ही जनता को धोखाधड़ी के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत देगा। जनता खुद ही पुराने और नए मूल्यों में अंतर पहचान सकेगी। जिससे जनता की जेब को राहत मिलेंगी और वे जीएसटी का भी समर्थन करेंगी।

जनता से की सहयोग की उम्मीद-

सरकार और जीएसटी काउंसिल जनता से सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं। महंगाई पर सिर्फ तभी लगाम लगाईं जा सकेंगी, जब सरकार और जनता दोनों साथ मिलकर सहयोग करे। सरकार ने तो महंगाई कम करने के लिए टैक्स रेट में संशोधन कर दिया हैं, लेकिन जनता को भी इसके प्रति जागरूक बनना होगा। तभी मुनाफाखोरों और भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसी जा सकती हैं। महंगाई भी तभी कम होगी, जब जनता अपने अधिकारों का सही इस्तेमाल कर सही मूल्य पर सामान खरीदेंगी।

जीएसटी काउंसिल ने इस महीने डिटर्जेंट, स्किन केयर प्रॉडक्ट्स, शैंपू, डियोड्रेंट, चॉकलेट्स, सहित कई वस्तुओं को 28 पर्सेंट वाले जीएसटी स्लैब से हटाकर 18 पर्सेंट वाले स्लैब में शिफ्ट कर दिया था। इसके साथ, कई प्रॉडक्ट्स ऐसे भी हैं, जिन्हें 18 पर्सेंट वाले स्लैब से 12 पर्सेंट वाले स्लैब में डाला गया था।

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