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भारत के पड़ोसी देश मालदीव में बढ़ते कट्टरपंथ के कारण एक पिता ने भारत से गुहार लगाई है कि वह उसके मदद से कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ना चाहता है। दरअसल कुछ समय पहले मालदीव की राजधानी माले में ब्लॉगर यामीन राशिद की हत्या कर दी गई थी। राशिद की हत्या के कुछ दिनों बाद पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार किया था। जानकारी के मुताबिक हत्या की वजहों को जानने के लिए पुलिस और सरकार कोई खास रूचि नहीं दिखा रही। किंतु राशिद के पिता समझते हैं कि उनके बेटे की हत्या की वजह मालदीव में बढ़ता कट्टरपंथ है। इसलिए यामीन के पिता हुसैन राशिद कट्टरपंथ को रोकने के लिए भारत की मदद चाहते हैं।

मालदीव में यह पहली ऐसी घटना नहीं है। 2014 में भी यामीन के दोस्त अहमद रिलवान का अपहरण कर लिया गया था जिनका आज तक कुछ अता पता नहीं चला। यामीन अपने दोस्त को खोजने का काम कर रहे थे कि अचानक यामीन की भी हत्या हो गई यामीन की हत्या उसी जगह की गई जहां से उनके दोस्त अहमद को किडनैप किया गया था।

यामीन की शिक्षा भारत में ही हुई। उनके पिता हुसैन का कहना है कि भले ही उनके बेटों का जन्म मालदीव में हुआ किंतु उनकी शिक्षा और परवरिश भारत में ही हुई। यामीन की स्कूली पढ़ाई केरल में हुई और बेंगलुरू में उन्होंने आईटी प्रोफेशनल की ट्रेनिंग ली थी। हुसैन बताते हैं कि मालदीव में यामीन ने भारत से आने के बाद एक स्कूल खोला था। यामीन ने एक सोशल सर्विस ऐप भी बनाया था जिसे 20 हजार यूरो का अवॉर्ड भी मिला था।

यामीन लगातार सामाजिक और राजनीतिक मद्दों पर लिखते थे। उनके लेखों के कारण कट्टरपंथियों का ध्यान उनकी ओर गया। सऊदी अरब मालदीव में कट्टरपंथ की विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग कर रहा है। मालदीव के नागरिकों में इस्लामिक स्टेट की तरफ झुकाव भी काफी बढ़ता जा रहा है।

जैसा कि हमें मालूम है कि कट्टरपंथ तेजी से पूरी दुनिया में पैर पसार रहा है और कई देश इसके विरोध में कठोर नीति अपनाने के लिए विवश हो रहे हैं। अमेरिका का सात मुस्लिम देशों पर बैन,चीन का धार्मिक कट्टरपंथ को लेकर हाल ही में कठोर होना कट्टरपंथ के खिलाफ सिर्फ एक छोटा सा कदम है। कुछ महीनों पहले ब्रिटिश पत्रकार तुफैल अहमद ने लिखा था कि हैदराबाद, महाराष्ट्र, केरल सहित समूचे भारत में युवाओं को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है। भारत में आए मेहमान तारेक फतेह पर 19-02-2017 की रविवार को लगभग 100 मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा हमला,पाकिस्तान में हाल में हुए सूफियों पर हमला आदि कई उदाहरण है जो यह बयां करता है कि अगर सभी देशों ने कट्टरपंथ के खिलाफ अपनी विरोध नीति तेज नहीं की तो अंजाम बहुत बुरा होगा। यामीन और अहमद की मौत कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई में हो चुकी है लेकिन अगर समस्त देशों द्वारा इसपर लगाम नहीं कसी गई तो ऐसे मामलों की संख्या बढती ही जाएगी।

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