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सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार चार सीनियर जजों ने शुक्रवार (12 जनवरी) को मीडिया से बात की। इन जजों ने सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल हुए।

जस्टिस जे. चलेमेश्वर ने कहा कि किसी भी देश के इतिहास में यह अभूतपूर्व घटना है क्‍योंकि हमें यह ब्रीफिंग करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उन्‍होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बहुत कुछ ऐसा हुआ है जो नहीं होना चाहिए था। हमें लगा हमारी देश के प्रति जवाबदेही है और कोई 20 साल बाद हम पर आरोप ना लगाए कि हमने अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाई है। हमने चीफ जस्टिस को मनाने की कोशिश की, लेकिन हमारे प्रयास नाकाम रहे अगर इस संस्थान को नहीं बचाया गया तो लोकतंत्र नाकाम हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि चीफ जस्टिस को सुधारात्मक कदम उठाने के लिए कई बार मनाने की कोशिश की गई, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे प्रयास विफल रहे। उन्‍होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में प्रशासन सही से नहीं चल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हमने देश के सामने यह बातें नहीं रखी और हम नहीं बोले तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। हमने चीफ जस्टिस से अनियमितताओं पर बात की, उन्होंने बताया कि चार महीने पहले हम सभी चार जजों ने चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था जो कि प्रशासन के बारे में था, हमने कुछ मुद्दे उठाए थे लेकिन इन पर ध्यान नहीं दिया गया।

जजों  ने कहा कि चीफ जस्टिस पर देश को फैसला करना चाहिए। हम बस देश का कर्ज अदा कर रहे हैं। जजों ने कहा कि हम नहीं चाहते कि हम पर कोई आरोप लगाए। यह पहली बार है कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने प्रेस कांफ्रेंस की है और गंभीर सवाल उठाए हैं।

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