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Flipkart ने Festive Season पर पेश किया ‘Art Forms of India’, पिछले साल की तुलना में 23% ज़्यादा बिक्री का अनुमान

Flipkart ने त्योहारी फ्लैगशिप इवेंट (Festive Flagship Event), द बिग बिलियन डेज़ (The Big Billion Days) के 8वें संस्करण की तैयारी कर रहा है। फ्लिपकार्ट अपने फ्लिपकार्ट समर्थ कारीगरों, बुनकरों और हस्तशिल्प बनाने वालों के साथ सक्रियता से काम कर रहा है, ताकि उनकी आजीविका और व्यापार को बढ़ाया जा सके। इस टीबीबीडी (TBBD) में फ्लिपकार्ट समर्थ से जुड़े कारीगरों और बुनकरों ने ‘आर्टफॉर्म्स ऑफ इंडिया’ (‘Art forms of India’) थीम के तहत उत्पादों की खास श्रृंखला तैयार की है। इस श्रृंखला के ज़रिए वे त्योहारी सीजन के दौरान ऑनलाइन खरीदारी (Online Shopping) करने वाले देश भर के ग्राहकों तक पहुंचना चाहते हैं।

फ्लिपकार्ट समर्थ को टैक्नोलॉजी के ज़रिए वंचित स्थानीय समुदायों को सस्टेनेबल और समावेशी प्लेटफार्म देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह Government Institutions, Livelihood Missions और NGOs के साथ मिलकर काम कर रहा है। पिछले साल से इस कार्यक्रम की बिक्री में 7 गुना बढ़ोतरी हुई है। अब यह बाज़ार तक पहंचने के बेहतर अवसर और डिजिटल कॉमर्स की समझ देकर 9,50,000 लोगों की आजीविका पर सकारात्मक असर डाल रहा है। पिछले साल, फ्लिपकार्ट के वार्षिक त्योहारी इवेंट में शामिल रहे कारीगरों ने गैर-त्योहारी समय की तुलना में अपनी आय में 2.5 गुना बढ़ोतरी देखी थी। इस साल, ‘आर्टफॉर्म्स ऑफ इंडिया’ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय विशेषता दिखाने वाले उत्पादों को देश भर के ग्राहकों तक पहुंचाएगा।

फ्लिपकार्ट के सीनियर डायरेक्टर और मार्केटप्लेस के प्रमुख, जगजीत हरोडे ने कहा, “इस त्योहारी सीजन में बड़ी संख्या में लाभार्थी हमारे साथ जुड़े हैं। हम उनको ऐसा समावेशी प्लेटफार्म देने जा रहे हैं, जहां वे डेडिकेटेड स्टोर फ्रंट के ज़रिए अपने अलग-अलग उत्पादों और कलेक्शन का प्रदर्शन कर सकते हैं। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खरीदारी करते समय भारतीय ग्राहक इस बात को जानें कि इन समुदायों की आजीविका में वे कितना योगदान दे रहे हैं।”

‘आर्टफॉर्म्स ऑफ इंडिया’ में 28 उत्पाद दिखेंगे

‘आर्टफॉर्म्स ऑफ इंडिया’ में 28 उत्पादों के लिमिटेड एडिशन देखने को मिलेंगे। इन्हें पश्चिमी क्षेत्र के सबसे बड़े एम्पोरियमों में से एक, गरवी गुर्जरी जैसे भागीदारों द्वारा क्यूरेट किया गया है। यह पूरे राज्य के करीब 2,000 से ज़्यादा कारीगरों से जुड़ा है। यह देश भर में आदिवासी कारीगरों द्वारा बनाए गए उत्पादों को बढ़ावा देने और उन्हें मार्केट करने के लिए जिम्मेदार और भारत के करीब 3,50,000 आदिवासियों पर असर रखने वाले आदिवासी कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत चलने वाले ट्राइब्स इंडिया (ट्राइफेड) और एनयूएलएम, देश भर में आजीविका पैदा करने का कार्यक्रम जो करीब 500 से ज़्यादा स्वयं सहायता समूहों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

आदिवासियों में अपार क्षमता

प्रवीर कृष्ण, आईएएस, प्रबंध निदेशक, ट्राइफेड, भारत सरकार, ने कहा,“ट्राइफेड आदिवासी अर्थव्यवस्था को दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से काम कर रहा है, क्योंकि आदिवासियों में अपार क्षमता जो अभी तक सामने नहीं आई है। उनकी अपनी आर्थिक व्यवस्था है। ये ऐसे लोग हैं, जिनके पास जीवन जीने का अद्भुत कौशल है। बस उनके पास मार्केटिंग की समझ नहीं है। फ्लिपकार्ट का बिग बिलियन डेज़ न केवल आदिवासी समुदायों के बनाए अनोखे हस्तशिल्प को प्रदर्शित करने का बेहतरीन प्लेटफार्म बनेगा, बल्कि ट्राइफेड के मिशन और सोच को भी आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इसकी सहायता से ये उत्पाद आम जनता तक पहुंचेंगे।

डीएवाई-एनयूएलएम कार्यक्रम के तहत लक्ष्यज्योति स्वयं सहायता समूह से जुड़ी कारीगर, सुनमोनी कालिता ने कहा,“मैं बचपन में जलकुंभी के फूलों के साथ खेलती थी क्योंकि मेरे इलाके में बहुत सारी जमीन पर पानी जमा रहता था। मुझे जलकुंभी बहुत पसंद है। स्वयं सहायता समूह में शामिल होने के बाद मैंने जलकुंभी से बनने वाले उत्पादों के बारे में डीएवाई-एनयूएलएम से ट्रेनिंग हासिल की। मेरे उत्पादों को नगांव, असम में बने सिटी लाइवलीहुड सेंटर (सीएलसी) के ज़रिए बेचा और प्रदर्शित किया जा रहा है। मुझे बहुत खुशी हो रही है कि हमारे गुवाहाटी सेलर पॉइंट के ज़रिए मेरे उत्पाद अब फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध होंगे और पूरे देश में बाजार तक पहुंचेंगे।”
इसके अलावा, फ्लिपकार्ट अपने फ्लिपकार्ट कैमरा के ज़रिए 3डी और एआर कैपेबिलिटीज़ भी लाने जा रहा है, ताकि ‘आर्टफॉर्म्स ऑफ इंडिया’ के उत्पादों की खरीदारी करने वाले ग्राहकों को खरीदारी का बेहतरीन अनुभव हासिल हो। ग्राहक हैंडबैग और घर सजाने के चुनिंदा हस्तशिल्प उत्पादों के साथ इंटरेक्ट कर पाएंगे और यह समझ पाएंगे कि उनके घर में ये उत्पाद कैसे लगेंगे। इसके ज़रिए फ्लिपकार्ट टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके समाज के वंचित वर्गों को सशक्त बना रही है।

रेडसीर की ई-कॉमर्स फेस्टिव सीज़न रिपोर्ट के अनुसार ई-कॉमर्स में इस साल पिछले साल की तुलना में 23% ज़्यादा बिक्री होने की संभावना है। इसके पीछे मज़बूत कंज्यूमर फनल एक्सपेंशन और कोविड के बाद ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते इस्तेमाल का हाथ है। इससे स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को ई-कॉमर्स के ज़रिए ग्राहकों की मांग से फायदा उठाने का मौका मिला है और अपनी आजीविका बढ़ाने में भी मदद मिली है।

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