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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एक पूर्व जज ने अपनी और एक निलंबित ट्रायल कोर्ट मजिस्ट्रेट के बीच की कथित फोन वार्ता की जांच रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है। पुलिस को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने दिया था उनकी और एक निलंबित ट्रायल कोर्ट मजिस्ट्रेट की बातचीत की जांच का आदेश।


सेवानिवृत्त जस्टिस वी. ईश्वरैय्या ने अपनी याचिका में इस घटना को न्याय पालिका के खिलाफ गंभीर साजिश करार दिया है। जस्टिस ईश्वरैय्या ने याचिका में हाईकोर्ट के आदेश को अनुचित व अवैध बताते हुए स्थगित करने की गुहार लगाई है। साथ ही यह भी कहा है कि यह आदेश बिना उन्हें कोई नोटिस दिए पारित किया गया है और इससे उनका अनावश्यक शोषण हो रहा है

पूर्व जज ने याचिका में कहा, हाईकोर्ट ने 13 अक्तूबर को अपना आदेश निलंबित जिला मुंसिफ मजिस्ट्रेट एस. रामकृष्णा की तरफ से दाखिल प्रार्थनापत्र के आधार पर दिया है। यह प्रार्थनापत्र एक ऐसी जनहित याचिका में दिया गया था, जो इस मामले से नहीं जुड़ी है। यह जनहित याचिका अदालत भवन व परिसर में कोविड गाइडलाइंस को लागू कराने के लिए दी गई थी।

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