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आज देश शिक्षक दिवस यानी teachers day मना रहा है। यह मौका शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए खास है। शिक्षा के बिना मनुष्य अधूरा या अपूर्ण माना गया है। देश की तमाम नामी हस्तियों ने इस मौके पर अपने-अपने अनुभव साक्षा किए हैं। जहां जहां प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने भी इस मौके पर देश को शुभकामनाएं देते हुए डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद किया। वहीं टीचर्स डे के मौके पर गूगल ने एनिमेटेड डूडल बनाकर इस दिन को सेलिब्रेट किया है। गूगल ने अपने डूडल में g को ग्लोब के शेप में बनाया है जो घूमकर एक शिक्षक का रूप ले लेता है, और फिर उसमें से कुछ बुलबुले निकलते हैं जो मैथ्स से लेकर केमिस्ट्री और स्पोर्ट्स से लेकर म्यूजिक को दर्शाते हैं।

इस डूडल के जरिए गूगल ने ये दर्शाने की कोशिश की है कि शिक्षक हमारी जिंदगी में क्या मायने रखते हैं? वो शिक्षक ही होते हैं जो हमें इस लायक बनाते हैं कि हम खुद के पैरों पर खड़े हो सकें। गुरु शिष्य का रिश्ता बेहद खास होता है और इसी खास रिश्ते को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

राष्ट्रपति राम कोविंद ने ट्वीट कर शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षकों को दी शुभकामनाएं दी, और कहा कि शिक्षक दिवस पर मैं डॉ. एस. राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और देश के सभी शिक्षकों को हार्दिक बधाई देता हूं। राष्ट्र-निर्माण में और ज्ञान, शान्ति एवं सौहार्द से पूर्ण दुनिया के निर्माण में हमारे महान गुरु हमारी सहायता और मार्गदर्शन करें।

भारत में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के मौके पर शिक्षक दिवस हर साल 5 सितंबर को मनाया जाता है। वहीं यूनेस्को ने 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस घोषित किया है।  बता दं कि 5 सितंबर 1962 को डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक विद्वान और दार्शनिक होने के साथ-साथ एक महान शिक्षक भी थे। उन्होंने अपने क्षेत्र में कई बड़े काम किए जिसकी वजह से उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

दरअसल, डॉ सर्वपल्ली भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति भी रह चुके हैं। जब वे राष्ट्रपति बने तो लोगों ने 5 सितंबर को  ‘राधाकृष्णन दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला लिया। लेकिन ये सुझाव राधाकृष्णन को पसंद नहीं आया और उन्होंने इस दिन को ‘टीचर्स डे’ के तौर मनाने का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद से हर साल 5 सितंबर को ‘टीचर्स डे’ के रूप में मनाया जाने लगा। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन दार्शनिक थे, दुनिया के धर्मों के व्याख्याता और भारत की संस्कृति के दूत भी! सेना के सर्वोच्च कमांडर के रूप में उन्होंने देश की दो जंगों में अगुवाई की लेकिन इन सारी भूमिकाओं के निर्वाह के बीच उनका मन अपने को शिक्षक ही मानता रहा। 17 अप्रैल 1975 को उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद 1984 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

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