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जीएसटी को लागू हुए लगभग तीन महीनें हो गए हैं। ऐसे में व्यापारियों में सरकार को लेकर खासा गुस्सा देखा गया था। साथ ही आम आदमी भी इससे परेशान था। सरकार भी जीएसटी को लेकर विपक्षियों के निशाने पर थी। ऐसे में सरकार को जल्द ही यह फैसला करना था कि जीएसटी में और क्या बदलाव किए जाएं। शुक्रवार को जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई। इस बैठक में कई बदलाव देखने को मिले। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि हमनें इन तीन महीनों में  अलग-अलग कारोबारों पर क्या असर है और लोगों के क्या अनुभव रहे हैं, इन मुद्दों पर इस बैठक में चर्चा किया।’

केंद्र ने दिवाली और धनतेरस से पहले सर्राफा कारोबारियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने ज्वैलरी कारोबार को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के दायरे से बाहर कर दिया। साथ ही जीएसटी में बदलाव के बाद अब 2 लाख रुपये तक की ज्वैलरी की खरीदारी पर पैन देना जरूरी नहीं होगा। पहले 50 हजार रुपये से ज्यादा की खरीदारी पर PAN देना अनिवार्य था। इसके साथ ही सरकार ने व्यापारियों को सुविधा देते हुए हर तीन महीने में रिटर्न फाइल करने की व्यवस्था कर दी है। अब डेढ़ करोड़ के टर्नओवर पर 3 महीने में रिटर्न भरना होगा। कंपोजिशन स्कीम की सीमा 75 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई है। वहीं अब निर्यातकों को 10 अक्टूबर से टैक्स रिफंड किया जाएगा। वित्तमंत्री ने कहा कि निर्यात पर 0.1 प्रतिशत का जीएसटी लागू है। जीएसटी काउंसिल में फैसला हुआ कि दीर्घकालीन समाधान के लिए हर निर्यातक को ई-वालेट मिलेगा और एक निश्चित धनराशि उसे एडवांस रिफंड के लिए दी जाएगी। यह ई-वालेट अप्रेल 2018 तक दे दिया जाएगा। जेटली ने कहा कि आम, खाखरा और आयुर्वेदिक दवाओं पर जीएसटी की दर 12 से 5 फीसदी की गई है। स्टेशनरी के कई सामान पर जीएसटी 28 से 18 प्रतिशत कर दी गई है। हाथ से बने धागों पर जीएसटी 18 से 12 प्रतिशत कर दी गई है।

ट्रेडिंग सेक्टर से जुड़े कारोबारियों को एक करोड़ तक आय पर एक फीसदी, मैन्यूफेक्चरिंग को दो फीसदी और रेस्टोरेंट कारोबारियों को पांच फीसदी देना होगा। जीएसटी काउंसिल रिवर्स चार्ज पर भी राहत देने के मूड में नजर आ रही है। माना जा रहा है का काउंसिल अगली बैठक में इस पर कोई अहम फैसला ले सकती है। इस बैठक में सबसे अच्छी बात ये रही कि अब एक ही फॉर्म से जीएसटी फाइल की जा सकेगी। ‘ वित्त मंत्री ने बताया कि पहली चर्चा एक्सपोर्ट के संबंध में थी। एक्सपोर्ट पर टैक्सेशन तो लगता नहीं है। एक्सपोर्ट को दुनिया के बाजार में प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। इस मामले में एक कमेटी के सुझावों को माना गया है।

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