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कांग्रेस ने बिजली और पेट्रोलियम उत्पादों को वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग करते हुए रविवार को कहा कि मोदी सरकार जीएसटी लागू करने की पहली बरसी पर भले ही जश्न मना रही है लेकिन सच्चाई यह है कि अर्थव्यवस्था पर इसका सकारात्मक असर नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने यहां पार्टी मुख्यालय में विशेष संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्हें खुशी है कि उनकी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने 2006 में नयी कर व्यवस्था लागू करने के लिए जीएसटी की परिकल्पना की थी और वह आज अस्तित्व में है लेकिन दुर्भाग्य यह है कि उसके स्वरूप को बदला गया है जिसके कारण देश की अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभावी नतीजे  नजर नहीं आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने जो जीएसटी लागू किया था, वह अत्यंत दोषपूर्ण है। इसमें इतनी खामियां है कि सामान्य नागरिकों, छोटे  व्यापारियों, कारोबारियों तथा निर्यातकों के लिए जीएसटी गलत शब्द बन गया है। सिर्फ कर प्रशासन मोदी सरकार के जीएसटी से खुश है क्योंकि उसे मनमानी करने का भरपूर मौका दिया गया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी आरंभ से ही बिजली और पेट्रोल तथा डीजल आदि को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं। पार्टी की सरकार के वित्त मंत्री जीएसटी परिषद की बैठक में इन मुद्दों को उठाते भी हैं लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि आम जनता पर पेट्रोलियम पदार्थों की आसमान छूती कीमतों को बोझ कम करने के लिए इसे जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए।

वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) के क्रियान्वयन के एक साल पूरे होने के विशेष मौके पर देश की जनता को बधाई दी है। पीएम मोदी ने माइक्रो-ब्लागिंग साइट ट्विटर पर लिखा कि सहकारी संघवाद के व्यवसायिक उदाहरण और ‘ टीम इंडिया ‘ की भावना से परिपूर्ण जीएसटी से भारतीय अर्थव्यवस्था में एक सकारात्मक बदलाव आया है।

उन्होंने कहा कि देश में नयी कर प्रणाली के जरिए विकास, सहजता और पारदर्शिता कायम हुई है तथा उत्पादकता में वृद्धि के साथ ही व्यवसाय की सुगमता बढ़ रही है। समान कर व्यवस्था से विशेषकर छोटे और मध्यम उद्यमी लाभान्वित हुए हैं।

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