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गुजरात के उच्च न्यायालय ने आसाराम बापू की अस्थायी जमानत याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि चूंकि आसाराम बापू के हजारों अनुयायी हैं, इसलिए इस बात की प्रबल संभावना है कि उनकी रिहाई पर, उनके अनुयायी उनसे मिलने के लिए एकत्रित होंगे, जो इस संकट की स्थिति को और भड़काएगा क्युकी कोविड 19 सर्वव्यापी महामारी है|

न्यायमूर्ति ए.एस. सुपेहिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने आसाराम बापू की विभिन्न आधारों पर 4 महीने की अवधि के लिए अस्थायी जमानत की मांग वाली आपराधिक जमानत याचिका पर सुनवाई की ।

आसाराम की ओर से पेश वकील द्वारा बताए गए आधारों में से एक COVID 19 की वर्तमान महामारी की स्थिति बताई गयी थी, जहां आसाराम को राजस्थान में जेल में संक्रमित होने की पूरी संभावना थी।

वकील ने कहा कि आसाराम की उम्र 84 वर्ष है और वह विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है। इसके अलावा रिपोर्ट के अनुसार जोधपुर जेल के कुछ कैदी COVID 19 से प्रभावित हैं और इस बात की पूरी संभावना है कि आवेदक भी वायरस से भी प्रभावित हो सकता है।

हालाँकि, जमानत अर्जी का विरोध करने वाले राज्य सरकार के वकील ने कहा कि आवेदक ने वही कारण बताए जो पहले उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिए थे। इसके अलावा राजस्थान के जेल अधिकारी पर्याप्त सावधानी बरत रहे थे ताकि कैदियों के बीच COVID 19 का प्रसार न हो।

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