हिंदू धर्म में नवरात्रि को काफी महत्व दिया जाता है। चैत्र नवरात्रि और शरद नवरात्रि के बारे में तो हर कोई जानता है। लेकिन बुहत कम लोगों को ही पता है कि एक साल में पांच बार नवरात्रि होती है। इसे गुप्त नवरात्र कहा जाता है। ये हैं तीन नवरात्र के नाम, पौष गुप्त नवरात्रि, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, और माघ, माघ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को माघ नवरात्र कहते हैं इसकी शुरूवात 12 फरवरी से हो रही है। इसे कई राज्यों में शिशिर नवरात्रि भी कहा जाता है।

चैत्र और शरद नवरात्रि के बारे में सभी जानते हैं इसलिए पूजा विधी और शुभ मुहूर्त क बारे में पता होता है लेकिन माघ की नवरात्र के बार में लोगों को अधिक पता नहीं होता है इसलिए हम यहां इस नवरात्र से जुड़ी पूजा विधा , शुभ मूहुर्त के बारे में बताएंगे।

पूजा विधी

मां दुर्गा की प्रतिमा को एक साफ पटरी पर स्थापित करें और मां को लाल रंग की चुनरी पहनाएं। नारियल, फल और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं. मां के लिए लाल फूल सर्वोत्तम होता है पर मां को आक, मदार, दूब और तुलसी बिलकुल न चढ़ाएं। दीपक जलाकर ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप करें और दुर्गा चालीसा का पाठ करें। मां को दोनों वेला भोग भी लगायें , सबसे सरल और उत्तम भोग है लौंग और बताशा। पूजा में शामिल सभी लोगों को प्रसाद दें। पूरे नौ दिन अपना खान पान और आहार सात्विक रखें।

घट स्थापना मुहूर्त

सुबह 8 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 59 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक

इन बातों का रखें ख्याल

एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर मां की मूर्ति या प्रतिकृति की स्थापना करें. मां के समक्ष एक बड़ा घी का एकमुखी दीपक जलाएं। सुबह और शाम मां के विशिष्ट मंत्र का 108 बार जप करें। मंत्र होगा – “ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाय विच्चे।” तंत्र मंत्र की साधना करने वाले लोग माघ गुप्त नवरात्रि में आधी रात में मां दुर्गा की पूजा करते हैं।

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