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हिंदी भाषा को वैश्विक स्‍तर पर लोकप्रिय बनाने के प्रयास अभी भी जारी हैं।  देश हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाता है। 14 सितंबर 1949 को ही भारत के आजाद होने के बाद देश ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था। परंतु राष्ट्रभाषा का दर्जा हिंदी को आज तक नहीं मिला। हिंदी प्रेमियों को इसका आज भी मलाल है।

हिंदी हम सबकी भाषा है। जन-जन की भाषा है। हिंदी के लिए बड़े-बड़े विद्वानों ने समय-समय पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। आइए जानते हैं क्या कहते हैं हिंदी के लिए महापुरुष…..

  • अगर हिन्दुस्तान को सचमुच आगे बढ़ना है, तो चाहे कोई माने या न माने, राष्ट्रभाषा तो हिंदी ही बन सकती है, क्योंकि जो स्थान हिंदी को प्राप्त है, वह किसी और भाषा को नहीं मिल सकता.. – राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
  • मैं उन लोगों में से हूं, जो चाहते हैं और जिनका विचार है कि हिंदी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है… -लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक
  • जिस भाषा में गोस्वामी तुलसीदास जैसे कवि ने कविता की हो, वह अवश्य ही पवित्र है और उसके सामने कोई भाषा नहीं ठहर सकती… – राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
  • हिंदी एक जानदार भाषा है… वह जितनी बढ़ेगी, देश का उतना ही नाम होगा… -प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू
  • हिंदी भारतवर्ष के हृदय-देश स्थित करोड़ों नर-नारियों के हृदय और मस्तिष्क को खुराक देने वाली भाषा है... – आचार्य हज़ारीप्रसाद द्विवेदी
  • जनता की बात जनता की भाषा में होनी चाहिए… – राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
  • इस समग्र देश की एकता के लिए हिंदी अनिवार्य है… – राजा राममोहन राय
  • हिंदी को गंगा नहीं, बल्कि समुद्र बनना होगा... – आचार्य विनोबा भावे
  • हिंदी ही उत्तर और दक्षिण को जोड़ने वाली समर्थ भाषा है… – अनन्त शयनम अयंगर
  • राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है… मेरा यह मत है कि हिंदी ही हिन्दुस्तान की राष्ट्रभाषा हो सकती है और होनी चाहिए… – राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
  • हिंदी संस्कृत की बेटियों में सबसे अच्छी और शिरोमणि है। – ग्रियर्सन
  • संस्कृत माँ, हिंदी गृहिणी और अंग्रेजी नौकरानी है। – डॉ. फादर कामिल बुल्के
  • राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की शीघ्र उन्नति के लिए आवश्यक है। – महात्मा गाँधी
  • हिंदी भाषा और हिन्दी साहित्य को सर्वांगसुंदर बनाना हमारा कर्त्तव्य है। – डॉ. राजेंद्रप्रसाद
  • निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। – भारतेंदु हरिश्चंद्र
  • भाषा के उत्थान में एक भाषा का होना आवश्यक है। हिंदी सबकी है। – पं. कृ. रंगनाथ पिल्लयार
  • मैं मानती हूँ कि हिंदी प्रचार से राष्ट्र का ऐक्य जितना बढ़ सकता है वैसा बहुत कम चीजों से बढ़ सकेगा – लीलावती मुंशी
  • राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है – अवनींद्रकुमार विद्यालंकार
  • हिंदी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है – शंकरराव कप्पीकेरी
  • दक्षिण की हिंदी विरोधी नीति वास्तव में दक्षिण की नहीं, बल्कि कुछ अंग्रेजी भक्तों की नीति है – के.सी. सारंगमठ
  • हिंदी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है – वी. कृष्णस्वामी अय्यर
  • राष्ट्रीय एकता की कड़ी हिंदी ही जोड़ सकती है – बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’
  • हिंदी को तुरंत शिक्षा का माध्यम बनाइए – बेरिस कल्यएव
  • हिंदी साहित्य की नकल पर कोई साहित्य तैयार नहीं होता – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
  • यह महात्मा गाँधी का प्रताप है, जिनकी मातृभाषा गुजराती है पर हिंदी को राष्ट्रभाषा जानकर जो उसे अपने प्रेम से सींच रहे हैं – लक्ष्मण नारायण गर्दे
  • हिंदी हमारे देश और भाषा की प्रभावशाली विरासत है – माखनलाल चतुर्वेदी
  • हिन्दुस्तान को छोड़कर कोई अन्य देश नहीं है, जहां कोई राष्ट्रभाषा नहीं हो – सैयद अमीर अली मीर
  • सरलता, बोधगम्यता और शैली की दृष्टि से विश्व की भाषाओं में हिंदी महानतम स्थान रखती है – अमरनाथ झा
  • हिंदी सरल भाषा है – जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी
  • जीवन के छोटे से छोटे क्षेत्र में हिंदी अपना दायित्व निभाने में समर्थ है – पुरुषोत्तमदास टंडन
  • बिहार में ऐसा एक भी गाँव नहीं है जहाँ केवल रामायण पढ़ने के लिए किसी ने हिंदी न सीखी हो – सकलनारायण पांडेय
  • संस्कृत की विरासत हिंदी को तो जन्म से ही मिली है – राहुल सांकृत्यायन
  • हिंदी में हम लिखें पढ़ें, हिन्दी ही बोलें – पं. जगन्नाथप्रसाद चतुर्वेदी
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