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1983 में वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम को अगले वर्ल्ड कप के खिताब के लिए करीब 24 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। भारत ने दूसरा वर्ल्ड कप महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में वर्ष 2011 में जीता। हालांकि 1983 से 2011 के बीच 6 बार विश्व कप टूर्नामेंट आयोजित किया गया और भारत इनमें से कई बार खिताब के करीब तक भी पहुंचा लेकिन तब शायद जीत भारतीय टीम के नसीब में नहीं थी। इस बीच के 6 विश्व कप टूर्नामेंट में से 5 में मास्टर ब्लास्ट सचिन तेंदुलकर भी टीम का हिस्सा रहे थे। सचिन ने अपने करियर में तमाम बुलंदियों को छू लिया था लेकिन विश्व कप का खिताब वो अब भी भारतीय टीम को नहीं दिला पाए थे। फिर आखिरकार उन्होंने अपने करियर के छठे और आखिरी वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में वो मुकाम भी हासिल कर ही लिया।

अपने इसी सफर को याद करते हुए सचिन ने आज कहा कि काश 14 साल पहले 2003 विश्व कप के वक्त अगर खिलाड़ी आज की खेल शैली के हिसाब से खेलते तो हम वो वर्ल्ड कप भी जीत जाते। सचिन आजकल अपनी आने वाली फिल्म सचिन: अ बिलियंस ड्रीम्स की प्रोमोशन करने में वयस्त हैं। इस दौरान वह अपने करियर में घटित कई बातों का खुलासा भी जनता के सामने कर रहे हैं। तेंदुलकर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यदि हम वह मैच, आज खेलते तो खिलाड़ी अलग तरीके से खेलते। हम उस मैच में उत्साह से भरे थे और पहले ही ओवर से ही काफी उत्साहित थे। यदि उन्हीं खिलाड़ियों को आज मौका मिलता तो खेल के प्रति उनका रवैया दूसरा होता। उन दिनों 359 रन बनाना मुश्किल लगता था। आज के दौर में यह आसान लगता है। हम भी कई मौकों पर 325-340 से ज्यादा रन का स्कोर बना चुके हैं।’

गौरतलब है कि 2003 में दक्षिण अफ्रिका की धरती पर खेले गए क्रिकेट विश्व कप में भारत ने शानदार खेल दिखाते हुए फाइनल तक का सफर तय किया था।  भारत को विश्व कप जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। फाइनल में भारत का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से हुआ और उसने 50 ओवर में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए 2 विकेट खोकर 358 रन बना डाले। उस वक्त 300 से ज्यादा का स्कोर खड़ा करने के बाद विशेषज्ञ मानते थे कि विपक्षी टीम उस स्कोर का पीछा नहीं कर पाएगी। भारत के साथ भी ऐसा ही हुआ और पूरी टीम मात्र 234 रन पर ही ऑल आउट हो गई। भारत को भारी निराशा का सामना करना पड़ा था। 2003 का विश्व कप भले ही ऑस्ट्रेलिया ने जीता हो लेकिन मैन ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब सचिन को ही उनकी शानदार बल्लेबाजी के लिए दिया गया था।

2003 के पूरे विश्व कप में शानदार बल्लेबाजी करने के बाद भी सचिन भारत को फाइनल में जीत नही दिला पाए। इसी बात का गम वो आज जनता के साथ बांट रहे थे कि अगर वहीं बल्लेबाज आज के दौर में बल्लेबाजी करते तो हम विश्व कप जीत जाते।

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