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सुदीक्षा भाटी की मौत ने एक बार फिर यूपी में कानून व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है.. सुदीक्षा की उम्र भले ही 18-19 साल की थी.. लेकिन उसके सपनों के उड़ान की कोई सीमा नहीं थी.. सुदीक्षा के सपने उसकी उम्र से बहुत बड़े थे.. वो समाज में बदलाव लाने के लिए कुछ करना चाहती थी.. लेकिन उसी समाज में मौजूद मनचलों ने एक झटके में सब खत्म कर दिया.. अपने चाचा के साथ मामा के घर जा रही.. बुलंदशहर की सुदीक्षा भाटी की छेड़खानी के दौरान बाइक से गिरने से मौत हो गई.

मनचलों की छेड़खानी ने उसकी जान ले ली.. सुदीक्षा अपने चाचा के साथ बाइक सवार मनचलों से बचकर आगे बढ़ रही थी.. तभी बाइक के अनियंत्रित होने से वो सड़क पर गिरी और उसकी मौत हो गई। लेकिन सुदीक्षा के पिता का कहना है कि यह दुर्घटना नहीं हत्या है। इसकी सही तरीके से जांच होनी चाहिए।

बहरहाल, सुदीक्षा भाटी की मौत ने एक बार फिर यूपी में कानून व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है.. तो वहीं सियासी दलों ने भी इसे लेकर सरकार पर निशाना साधा.. BSP मुखिया मायावती ने कहा कि ये शर्मनाक और निन्दनीय घटना है.. यूपी सरकार को इस मामले में तुरंत दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए.. यूपी पुलिस का दावा है कि, राज्य में कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए तमाम कदम उठाए गए हैं.. इसके बावजूद अगर इस तरह की घटना होती है.. तो ये पुलिस-प्रशासन को सीधी चुनौती है।

शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल सुदीक्षा के सपनों को साकार करने में परिवार ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। पिता चाय बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं.. लेकिन, सुदीक्षा भाटी ने अपनी मेहनत के बलबूते अमेरिका में उच्च स्तर की पढ़ाई करने की कामयाबी हासिल की थी.. सुदीक्षा ने अमेरिकी सरकार से स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया था.. उन्हें 3 करोड़ 80 लाख रुपये की स्कॉलरशिप मिली थी.  लेकिन अब सब खत्म हो गया। ऐसे में  समाज को भी ये सोचना होगा.. कि, अगर इस तरह की विछिप्त मानसिकता के लोग खुलेआम घूमते रहे.. तो अपराध को रोकना मुश्किल होगा.. इस तरह के जुर्म को रोकने के लिए शासन-प्रशासन और समाज को साथ मिलकर काम करना होगा।

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