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कुछ साल पहले पनामा पेपर्स को लेकर दुनिय़ाभर में ऊथल-पुथल मची थी। इस घपलेबाजी में दुनिया भर के राजनेता, एक्टर्स, बिजनेसमैन आदि लोगों का नाम आया था। यहां तक की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का नाम भी इसमें सम्मिलित है। भारत में दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन का नाम भी इसमें उछला था। लेकिन अब कुछ इसी तरह का एक और पेपर्स लीक मामला सामने आया है। जिसे लेकऱ दुनिया भर में सियासत गर्म हो गई है। खास बात यह है कि पनामा पेपर्स की ही तरह यह भी इंवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म का ही नतीजा है कि इस तरह के घपलेबाजी और घोटालों का पर्दाफाश हो पाता है।

पैराडाइज पेपर्स मामले में केंद्रीय विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा का नाम सामने आया है। जयंत सिन्हा के साथ ही भाजपा सांसद आरके सिन्हा का नाम भी इस लिस्ट में बताया जा रहा है। यही नहीं इस मामले में बीजेपी और गैर बीजेपी दलों के सांसदों, बॉलीवुड हस्तियों समेत कुल 714 भारतीयों के नाम शामिल हैं। बिहार से बीजेपी के राज्य सभा सांसद रविन्द्र किशोर सिन्हा, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद वीरप्पा मोईली, पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम, बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन, संजय दत्त की पत्नी मान्यता का नाम भी इसमें सम्मिलित है।

हालांकि जयंत सिन्हा ने सफाई दी है कि जब वो राजनीतिक जीवन में आए, तब वो ओमेडियार के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे चुके थे। लेकिन, इस तथ्य पर जयंत सिन्हा के पास कोई जवाब नहीं है कि जब उन्होंने चुनाव लड़ा तो उन्होंने ओमेडियार के डायरेक्टर पद पर रहने की बात क्यों नहीं बताई। वहीं दूसरी तरफ राज्य सभा सांसद रविन्द्र किशोर सिन्हा से जब मीडिया ने प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उन्होंने संवाददाता से कलम मांगी और कागज पर लिखा, “7 दिन के भागवत यज्ञ में मौनव्रत है।”

बता दें कि पनामा पेपर्स लीक होने के 18 महीने बाद एक और बड़े वित्तीय डेटा से पर्दा हटा है। यह डेटा जर्मन अख़बार ज़्यूड डॉयचे त्साइटुंग के पास है, जिसकी जांच इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) ने 96 समाचार एजेंसियों के साथ की है। इस लीक को पैराडाइज पेपर्स कहा जा रहा है। इसमें 1.34 करोड़ दस्तावेज़ लीक हुए हैं। लोकसभा चुनाव 2014 में झारखंड के हजारीबाग से सांसद चुने जाने के बाद जयंत सिन्हा मोदी सरकार में राज्य मंत्री बनाए गए। मोदी सरकार में शामिल होने से पहले जयंत सिन्हा देश में ओमिद्यार नेटवर्क में बतौर मैनेजिंग डायरेक्टर काम करते थे। इस ओमिद्यार नेटवर्क ने अमेरिकी कंपनी डी लाइट डिजाइन में बड़ा निवेश किया था जबकि इस अमेरिकी कंपनी की टैक्स हैवन केमैन आइलैंड में सब्सिडियरी कंपनी होने की बात सामने आई है। ऑफ़शोर लीगल फ़र्म ऐपलबी के रिकॉर्ड के अनुसार सिन्हा ने डिलाइट डिज़ाइन में निदेशक के पद पर काम किया। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक़ जब जयंत सिन्हा ने 2014 के आम चुनाव में बतौर उम्मीदवार हलफ़नामा भरे तो उसमें उन्होंने इसकी जानकारी नहीं दी थी। इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा सचिवालय या 2016 में एक मंत्री के तौर पर इसकी जानकारी नहीं दी। गौरतलब है कि डी लाइट डिजाइन की स्थापना 2006 में कैलिफॉर्निया के सैन फ्रांसिस्को शहर में की गई थी। इसी नाम से कंपनी की एक सब्सिडियरी टैक्स हैवन केमैन आइलैंड में भी स्थित थी। ओमिद्यार नेटवर्क में जयंत सिन्हा सितंबर 2009 में शामिल हुए और दिसंबर 2013 में इससे इस्तीफा दे दिया। ओमिदियार नेटवर्क ने डी लाइट डिजाइन में निवेश किया था जिसने अपने केमैन आइलैंड स्थित सब्सिडियरी से 3 मिलियन अमेरिकी डॉलर का कर्ज लिया। एप्पलेबी रिकॉर्ड के मुताबिक इस कर्ज के लिए समझौता 31 दिसंबर 2012 को किया गया और इस वक्त जयंत सिन्हा कंपनी के डायरेक्टर पद पर मौजूद थे।

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