Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

मुंबई की आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इसी दौरान सर्वोच्च अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को पेड़ काटने पर रोक लगाने को कहा है, अदालत ने कहा कि अभी जितने पेड़ कट गए तो ठीक, लेकिन आगे पेड़ नहीं कटेंगे। पिछले एक हफ्ते से इस मामले पर मुंबई की सड़कों पर प्रदर्शन हो रहा है, कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से 2,646 पेड़ों को काटने की इजाजत मिली थी।


बता दें कि इसके लिए लॉ स्टूडेंट्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने सीजेआई को पत्र सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की अपील की थी। उधर मुंबई में गिरफ्तार 29 प्रदर्शनकारियों को हॉलीडे कोर्ट से जमानत मिलने पर ठाणे जेल से रिहा कर दिया गया। लेकिन, अदालत ने शर्त रखी है कि ये लोग अब किसी प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वह इस मामले को चेक करेंगे और आगे अपनी बात कहेंगे। अदालत ने कहा है कि अगर ये गलत है तो गलत है, चाहे एक प्रतिशत ही क्यों ना हो, अदालत ने इस दौरान महाराष्ट्र सरकार से हलफनामा मांगा है और मौजूदा स्थिति की जानकारी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट इस दौरान आरे कॉलोनी के संवेदनशील क्षेत्र होने पर फैसला करेगा। अब इस मामले की सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी।

कोर्ट ने गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी प्रदर्शनकारी बिना देरी के रिहा किए जाएं।

वहीं सुनवाई के बाद वकील संजय हेगड़े ने मीडिया को बताया कि सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में कहा है कि मेट्रो को जितने पेड़ काटने थे उतने काट लिए गए हैं। जस्टिस अरुण मिश्रा ने महाराष्ट सरकार से पूछा कि आरे का जंगल इको सेंसिटिव जोन है या फिर नो डेवलपमेंट जोन? कोर्ट ने इस संबंध में दस्तावेज दिखाने को कहा। कोर्ट ने कहा कि पेड़ नहीं काटे जाने चाहिए थे।

Also Read: मुंबई: आरे इलाके में पेड़ों की कटाई के बाद विरोध प्रदर्शन, धारा 144 लागू

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.